कलेसर/पंचकूला।
हरियाणा के सबसे संवेदनशील प्राकृतिक स्थलों में शुमार कलेसर नेशनल पार्क और कलेसर वन्य प्राणी विहार का ईको-सेंसिटिव जोन (ESZ) इन दिनों अवैध व्यावसायिक गतिविधियों का गढ़ बनता जा रहा है। वन्यजीव विभाग द्वारा कराए गए एक विशेष GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, संरक्षित क्षेत्र के आसपास 27 व्यावसायिक निर्माण, लग्जरी फार्म हाउस, गोदाम, वाइन शाप और कमर्शियल प्रतिष्ठान बिना किसी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के धड़ल्ले से चल रहे हैं।
हास्यास्पद स्थिति यह है कि जिस क्षेत्र में वन्यजीवों की शांति के लिए गाड़ियों का हॉर्न बजाना तक सख्त मना है, वहीं व्यावसायिक निर्माण और मनोरंजन गतिविधियां बेधड़क जारी हैं।
GPS सर्वे के चौंकाने वाले आंकड़े
वन्यजीव विभाग ने प्रत्येक निर्माण की सटीक लोकेशन दर्ज करने के लिए जीपीएस मैपिंग का सहारा लिया। रिपोर्ट में निर्माणों की अभ्यारण्य सीमा से दूरी का ब्योरा इस प्रकार है:
| निर्माणों की संख्या | अभ्यारण्य (WLS) सीमा से दूरी |
| 04 निर्माण | सीमा से बिल्कुल सटे हुए |
| 01 निर्माण | महज 15 मीटर दूर |
| 02 निर्माण | मात्र 30 मीटर दूर |
| 01 निर्माण | केवल 35 मीटर दूर |
| 02 निर्माण | 50 मीटर दूर |
| 01 निर्माण | 70 मीटर दूर |
| 02 निर्माण | 80 मीटर दूर |
| 01 निर्माण | 100 मीटर दूर |
प्रशासनिक ढिलाई: रिपोर्ट भेजने के बाद भी ‘ढाक के तीन पात’
सूत्रों के अनुसार, वन्य प्राणी विभाग की ओर से कई बार यह ग्राउंड रिपोर्ट डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) और जिला स्तरीय ईको-सेंसिटिव जोन कमेटी को भेजी जा चुकी है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर ना तो सीलिंग की कोई कार्रवाई हुई और ना ही अवैध निर्माणों को ढहाया गया। हालांकि मीटिंग्स का सिलसिला जारी है मगर अभी कुछ फाइनल नहीं हो पाया है।
प्रशासनिक लाचारी?
लगातार बैठकों का दौर जारी रहने के बावजूद इलाके में नए फार्म हाउस का बनना और व्यावसायिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। स्थानीय कमेटी के पास इस बेकाबू होते निर्माण को रोकने के लिए कोई ठोस रोड मैप नजर नहीं आ रहा।
जोनल मास्टर प्लान अब तक ‘अधर में’
ईको-सेंसिटिव जोन की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद जोनल मास्टर प्लान (Zonal Master Plan) तैयार कर लागू किया जाना अनिवार्य था। इसी प्लान के आधार पर यह तय होता है कि:
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किस क्षेत्र में कौन-सी गतिविधियां अनुमत होंगी।
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किन क्षेत्रों में पूरी तरह से निर्माण निषिद्ध रहेगा।
हालांकि, लंबे समय से मास्टर प्लान का मसौदा फाइलों में ही घूम रहा है। स्पष्ट जोनल प्लान लागू न होने के कारण अवैध निर्माणों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने में दिक्कत आ रही है।
पर्यावरणविदों ने जताई गहरी चिंता
पर्यावरण और वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कलेसर जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्र में समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो:
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प्राकृतिक आवास नष्ट होंगे: वन्यजीवों का प्राकृतिक गलियारा (Corridor) बाधित होगा।
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जैव विविधता को नुकसान: मानवीय हस्तक्षेप और शोर-शराबे से दुर्लभ जीव-जंतु पलायन को मजबूर होंगे।
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पर्यावरण असंतुलन: व्यावसायिक निर्माणों से उत्पन्न कचरा और प्रदूषण कलेसर के प्राकृतिक तंत्र को स्थाई क्षति पहुंचाएगा।
मुख्य बिंदु एक नज़र में
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अवैध निर्माण: ESZ में 27 व्यावसायिक निर्माण चिन्हित, अधिकांश के पास NOC नहीं।
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अत्यधिक नजदीकी: कई निर्माण सीमा से बिल्कुल सटे, कुछ मात्र 15 से 70 मीटर की दूरी पर।
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मास्टर प्लान लटका: जोनल मास्टर प्लान अब तक लागू न होने से कार्रवाई अटकी।
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बढ़ता खतरा: ‘नो-हॉर्न जोन’ तेजी से व्यावसायिक हब में तब्दील।



