यमुनानगर | बरसात के मौसम में यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर से किसानों की जमीन को बचाने के उद्देश्य से सिंचाई विभाग की जगाधरी डिवीजन द्वारा निवाजपुर गांव के समीप करीब 800 मीटर लंबाई में कराए गए स्टोन स्टीनिंग कार्य पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। किसानों का आरोप है उन्हें शक है कि यह काम पूरा नहीं हुआ है। इसके साथ ही काम को ढंग से नहीं किया गया, आनन-फानन में काम को निपटा कर छोड़ दिया गया, जिससे कटाव की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इन कार्यों के मोटे पत्थर का इस्तेमाल होना चाहिए मगर छोटे-छोटे पत्थर लगाकर इस काम को किया गया है।
किसान वेदप्रकाश का कहना है कि स्टोन स्टीनिंग का कार्य तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। उनका आरोप है कि बड़े और मजबूत पत्थरों की बजाय छोटे-छोटे पत्थरों को जंग लगी तार में भरकर जल्दबाजी में कार्य पूरा कर दिया गया। किसानों का कहना है कि यदि तेज बहाव आया तो यह संरचना अधिक समय तक टिक नहीं पाएगी।
सबसे बड़ा सवाल: बीच का हिस्सा क्यों छोड़ा गया?
किसानों के अनुसार, पिछले वर्ष किए गए स्टोन स्टीनिंग कार्य और इस वर्ष बनाए गए हिस्से के बीच काफी बड़ा क्षेत्र बिना किसी सुरक्षा कार्य के छोड़ दिया गया है। उनका कहना है कि यदि यमुना में उफान आता है तो पानी इसी खुले हिस्से से कटाव करेगा, जिससे दोनों ओर किया गया कार्य भी बेअसर हो सकता है।
पिछले साल भी बह गई थी किसानों की जमीन
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष भी यमुना किनारे सुरक्षा कार्य कराया गया था, लेकिन उसके बावजूद कटाव नहीं रुका और कई किसानों की खेती योग्य जमीन यमुना में समा गई। अब उन्हें डर है कि यदि इस बार भी गुणवत्ता और अधूरे कार्य की अनदेखी हुई तो हालात दोबारा दोहराए जा सकते हैं।
किसानों की मांग
- पूरे कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए।
- निर्माण सामग्री और गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच हो।
- पिछले और इस वर्ष के कार्य के बीच छोड़े गए हिस्से में भी सुरक्षा कार्य कराया जाए।
- बरसात के चरम दौर से पहले संभावित कटाव वाले स्थानों को मजबूत किया जाए।


