यमुनानगर : अपेक्षाकृत शांत माने जाने वाले यमुनानगर जिले में अवैध खनन की काली कमाई ने खनन माफिया के हौसले इस कदर बढ़ा दिए हैं कि अब उन्हें न तो कानून का डर रहा है और न ही प्रशासन का खौफ। मीडिया से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक से उलझना अब माफिया के लिए आम बात बनती जा रही है।
साढौरा में बिलासपुर के एसडीएम (SDM) के ऊपर गाड़ी चढ़ाने के प्रयास का ताजा मामला इसका सबसे बड़ा और खतरनाक उदाहरण है। इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब जिले के आला प्रशासनिक अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर आम आदमी की हैसियत ही क्या है?

नाकामी या लापरवाही? घटना के बाद भी कार्रवाई से नदारद प्रशासन

नियमों और परंपराओं के मुताबिक, किसी उच्च प्रशासनिक अधिकारी पर हुए ऐसे जानलेवा हमले के बाद सरकारी स्तर पर माफिया की इस ‘चोरी और सीनाजोरी’ वाली मानसिकता को पूरी तरह कुचल देने वाला सख्त रवैया सामने आना चाहिए था। लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी कहीं कोई बड़ी या नज़ीर बनने वाली कठोर कार्रवाई होती दिखाई नहीं दे रही है। प्रशासन की इस सुस्ती से माफिया के हौसले और पस्त होने के बजाय बुलंद हो रहे हैं।

कागजों में अवैध ‘परचेज़’ बना इस काले खेल का मुख्य जरिया

स्थानीय स्तर पर कंपनियों की परचेज को एक अगर किनारे पर रख दिया जाए तो पंचकूला तक से  कच्चे खनिज की खरीद पोर्टल पर आ रही है मगर कच्चा माल किसी सड़क से नहीं आ रहा, वैसे भी इतनी दूर से कच्चा माल मंगा कर उसको प्रोसेस कर बेचना संभव नहीं है, क्या कभी खनन विभाग ने चेक किया है कि पंचकूला से कौन सी गाड़ी किस नाके या टोल पर कब क्रास कर यमुनानगर पहुंची। 
  • पोर्टल के बिलों का खेल: धरातल पर न तो कहीं से कच्चा माल लेकर कोई गाड़ी आती है और न ही माल की वास्तविक आपूर्ति होती है, लेकिन सरकारी पोर्टल पर बिल लगातार जारी हो जाते हैं।
  • फर्जीवाड़े की आड़: इन्हीं कागजी बिलों की आड़ में स्थानीय स्तर पर धड़ल्ले से अवैध खनन को अंजाम दिया जाता है और अवैध रूप से निकाले गए माल को वैध बनाकर बेच दिया जाता है।

खनन विभाग की चुप्पी पर उठ रहे गंभीर सवाल

जिले में खनन विभाग की संदिग्ध चुप्पी के चलते इस तरह के कई मामले लगातार सामने आते रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल पक्के और कच्चे माल की चेकिंग व्यवस्था पर उठ रहा है:
  1. कच्चे माल पर मेहरबानी क्यों? पक्के माल (Processed Material) की जांच के लिए तो जगह-जगह नाके (Checkposts) लगाए गए हैं, लेकिन कच्चा माल (Raw Material) आखिर किस रास्ते और किस नाके से होकर निकल रहा है?
  2. चेकिंग से परहेज क्यों? नदियों और घाटों से उठने वाले कच्चे माल की गाड़ियों की गहन चेकिंग क्यों नहीं की जाती?
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि खनन विभाग और संबंधित प्रशासनिक अमला कागजों में हो रहे इस फर्जीवाड़े और कच्चे माल की आपूर्ति की कड़ाई से जांच करे, तो अवैध खनन का यह नेटवर्क एक दिन में ध्वस्त हो सकता है। मगर कोई कार्रवाई न होने से खनन विभाग की साख पर लगातार बटटा लग रहा है। 
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