कालका/पंचकूला। फॉरेस्ट डिविजन मोरनी के तहत आने वाली कालका रेंज के नानकपुरा ब्लॉक में खैर के बेशकीमती पेड़ों के अवैध कटान का एक बड़ा मामला सामने आया है। नानकपुरा ब्लॉक की पौना बीट में रात के अंधेरे में तस्करों ने बड़े पैमाने पर इस वारदात को अंजाम दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले में वन विभाग के दावों और जमीनी हकीकत (ग्राउंड जीरो) के बीच भारी अंतर देखने को मिल रहा है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जमीनी हकीकत बनाम विभागीय आंकड़े: 30-40 या सिर्फ 5?
विश्वस्त सूत्रों और स्थानीय जानकारी के अनुसार, पौना बीट के जंगलों में तस्करों ने 30 से 40 खैर के हरे-भरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाई है। बताया जा रहा है कि तस्कर बेहद शातिराना तरीके से अधिकांश कीमती लकड़ी को मौके से ले जाने में कामयाब रहे।
इसके उलट विभागीय अधिकारियों का दावा है कि बड़े पैमाने पर कटान नहीं हुआ है, बल्कि सिर्फ 5 पेड़ों का अवैध कटान हुआ है। विभाग का कहना है कि उन्होंने मुस्तैदी दिखाते हुए कटी हुई लकड़ी को मौके पर ही जब्त कर लिया है और वारदात में शामिल तस्करों की पहचान भी कर ली गई है।
एचएमटी के बाद दूसरी बड़ी वारदात, सुरक्षा दावों की खुली पोल
पंचकूला और आसपास के पहाड़ी इलाकों में वन संपदा की सुरक्षा को लेकर दावे तो बड़े-बड़े किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्करों के हौसले बुलंद हैं। हाल ही में पिंजौर के एचएमटी (HMT) परिसर में हुए खैर के अवैध कटान की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि कालका रेंज में यह दूसरी बड़ी वारदात सामने आ गई। लगातार हो रही इन घटनाओं से साफ है कि कहीं न कही खैर माफिया एक बार फिर से हावी हो चुका है।
वन मुख्यालय सख्त, जांच के आदेश
मामले की गंभीरता और लगातार हो रही किरकिरी को देखते हुए वन मुख्यालय ने तुरंत संज्ञान लिया है। मुख्यालय के आला अधिकारियों ने इस पूरे कटान मामले की गहन और निष्पक्ष जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। जांच में यह साफ किया जाएगा कि असल में कितने पेड़ कटे हैं और क्या इस लापरवाही में स्थानीय वन कर्मियों की कोई भूमिका रही है।
बड़ा सवाल: खैर की लकड़ी बाजार में बेहद कीमती मानी जाती है, जिसका इस्तेमाल कत्था बनाने और दवाइयों में होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब नियमित गश्त का दावा किया जाता है, तो तस्कर इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों को काटकर ले जाने में कैसे कामयाब हो जाते हैं?
फिलहाल, मुख्यालय के आदेशों के बाद मौके पर जांच होगी ओर कटान की हकीकत का पता लगाया जाएगा।




