कलेसर, यमुनानगर (हरियाणा): कलेसर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी एरिया के टिब्ब्डियों जंगल से खैर का अवैध कटान कर लकड़ी लेकर भागने की कोशिश को वन्य प्राणी विभाग ने नाकाम कर दिया। विभाग की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए रात के अंधेरे में छापेमारी कर एक आरोपी को रंगे हाथों दबोच लिया, जबकि उसके 6 अन्य साथी लकड़ी छोड़कर भागने में कामयाब रहे। वन विभाग ने पकड़े गए आरोपी के पास से खैर के 7 लट्ठे, कुल्हाड़ी और आरा बरामद किया है।

गुप्त सूचना पर रात में बिछाया गया जाल

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 3 जून 2026 की रात लगभग 12:15 बजे वन्य जीव निरीक्षक (कलेसर) राजबीर सिंह को गुप्त सूचना मिली कि कुछ तस्कर टिबडियाँ जंगल में खैर के पेड़ काटने के लिए घुसे हुए हैं। यह क्षेत्र वन्य जीव विहार कलेसर के अंतर्गत आता है और बेहद संवेदनशील है।

सूचना मिलते ही उप वन राजिक सुशील कुमार और वन दरोगा हरीश धीमान के साथ स्टाफ की एक विशेष टीम गठित की गई। टीम रात करीब 2:40 बजे जंगल में पहुंची और तस्करों को घेरने के लिए छिप गई।

अंधेरे का फायदा उठाकर भागे तस्कर, एक दबोचा

कुछ ही देर में टीम को 6 से 7 लोग अपने कंधों पर खैर की लकड़ी उठाए आते हुए दिखाई दिए। जैसे ही वे नजदीक पहुंचे, वन विभाग के स्टाफ ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। खुद को घिरता देख तस्करों में हड़कंप मच गया। स्टाफ ने मुस्तैदी दिखाते हुए एक आरोपी को मौके पर ही दबोच लिया, जबकि उसके अन्य साथी घने अंधेरे और जंगल का फायदा उठाकर अपने कंधों से लकड़ी नीचे गिराकर भाग निकले।

आरोपी ने कबूला जुर्म, साथियों के नामों का किया खुलासा

पकड़े गए आरोपी की पहचान जुलफ़ान (निवासी: ग्राम टिबडियाँ, डा० प्रतापनगर, जिला यमुनानगर) के रूप में हुई है। पूछताछ के दौरान आरोपी जुलफ़ान ने वन्य जीव विभाग के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने बताया कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर कलेसर वन्य जीव विहार क्षेत्र से खैर के 2 हरे पेड़ काटे थे।

उसने भागने वाले अपने 6 साथियों के नामों का भी खुलासा किया है, जो इस प्रकार हैं:

  1. दीन मोहम्मद

  2. कादिर

  3. उस्मान

  4. रिजवान

  5. इरशाद

  6. समीम (यह सभी आरोपी ग्राम टिबडियाँ, के निवासी हैं)

 मामले में हो सकती है 7 साल तक की जेल, कोर्ट से मांगी 14 दिन की रिमांड

वन्य जीव विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों ने न सिर्फ प्रतिबंधित खैर के पेड़ काटे हैं, बल्कि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 26A के तहत संरक्षित क्षेत्र में घुसकर वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास (Rehwas) और जंगल को भारी नुकसान पहुंचाया है। यह कृत्य धारा 51 के तहत एक गंभीर और दंडनीय अपराध है, जिसमें 3 साल से लेकर 7 साल तक की कड़ी सजा का प्रावधान है। विभाग ने पकड़े गए आरोपी जुलफ़ान का मेडिकल टेस्ट (शारीरिक परीक्षण) करवाकर उसे न्यायालय के समक्ष पेश कर दिया है। जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

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