यमुनानगर/जगाधरी। मानसून का सीजन दस्तक दे चुका है, लेकिन सिंचाई विभाग की जगाधरी डिविजन के अंतर्गत आने वाले बाढ़ राहत कार्य अभी भी कछुआ चाल से चल रहे हैं। धरातल पर अधूरे पड़े विकास कार्य विभाग के दावों की पोल खोल रहे हैं। आलम यह है कि जहां काम कब का पूरा हो जाना चाहिए था, वहां आज भी आनन-फानन में काम निपटाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की सुपरविजन पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। एचकेबी सर्कल की जगाधरी डिविजन के कामों की हालत लगता है सिंचाई विभाग के मुख्यालय को पता नहीं है, ओर अगर पता है तो आज तक जवाबदेही तय क्यों नहीं हुई।
रामपुर कांबोयान बदहाल स्थिति: पत्थर की जगह मिट्टी के कट्टे
ग्राउंड जीरो की बात करें तो रामपुर कांबोयान क्षेत्र में बाढ़ राहत के कार्य अभी भी अधर में लटके हैं। यहां एक तरफ साइट पटरी का काम रेंग रहा है, तो दूसरी तरफ ‘बनकट साइड’ में मिट्टी के कट्टे लगाकर जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है।
सूत्रों और तकनीकी योजना के अनुसार, इस संवेदनशील पॉइंट पर पत्थर का पक्का काम (स्टोन स्टडिंग) होना तय हुआ था ताकि नदी का तेज बहाव आबादी और खेतों को नुकसान न पहुंचा सके। लेकिन धरातल पर पत्थरों की जगह मिट्टी के कट्टे लगाए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों के साथ खिलवाड़ है।
लेबर का दावा: पानी में बह गए पत्थर!
जब मौके पर काम कर रही लेबर से इस संबंध में बात की गई, तो एक चौंकाने वाला सच सामने आया। लेबर का कहना था कि यहां पत्थर का काम पूरा कर दिया गया था, लेकिन पिछले दिनों नदी में आए थोड़े से पानी की वजह से वे सारे पत्थर बह गए। यही वजह है कि अब आनन-फानन में उस जगह को भरने के लिए मिट्टी के कट्टे लगाए जा रहे हैं।
बड़ा सवाल: अगर शुरुआती बारिश में यह हाल, तो आगे क्या होगा?
लेबर के इस बयान और मौके की स्थिति ने प्रशासनिक मुस्तैदी और सरकारी पैसे के सदुपयोग पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है:
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कैसी हुई सुपरविजन? अगर सिंचाई विभाग के आला अधिकारी लगातार सुपरविजन का दावा कर रहे हैं, तो उनकी नाक के नीचे ऐसा कमजोर काम कैसे हुआ कि नदी का शुरुआती पानी ही पत्थरों को बहा ले गया?
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मानसून का खतरा बरकरार: सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह है कि अगर महज एक-दो दिन की शुरुआती बारिश और नदी के सामान्य जलस्तर ने विभाग के पक्के काम को बहा दिया, तो अभी तो पूरा मानसून सीजन बाकी है। जब पहाड़ों में भारी बारिश होगी और यमुना का जलस्तर खतरे के निशान को पार करेगा, तब मिट्टी के कट्टों के सहारे यह क्षेत्र बाढ़ से कैसे महफूज रहेगा?
स्थानीय ग्रामीणों में भी इस ढुलमुल रवैए को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते मजबूत और स्थायी प्रबंध नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में रामपुर कांबोयान और आसपास की कृषि भूमि पर बाढ़ का बड़ा खतरा मंडरा सकता है।
वहीं इस बारे में एसडीओ सहदेव का कहना है कि जिस साइट पर मिटटी के बैग लगाए जा रहे है वहां कुछ काम की रिपेयर हो रही है कुछ नया काम है ओर दूसरी साइड में वन विभाग द्वारा मंजूरी न दिए जाने से काम लेट हुआ है।



