पंचकूला: हरियाणा वन विभाग में नियमों को ताक पर रखकर चहेते अधिकारियों को रेवड़ियों की तरह बांटे गए अवैध प्रमोशन के मामले में सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। वन विभाग के आला अधिकारियों द्वारा माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने और ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति की धज्जियां उड़ाने की शिकायत पर सरकार ने एक उच्च स्तरीय त्रि-सदस्यीय जाँच समिति (Enquiry Committee) का गठन कर दिया है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF), हरियाणा द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल मामले की जाँच कर कमेटी को 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपनी होगी।

वन मंत्री राव नरबीर सिंह के कड़े निर्देश पर एक्शन

सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले की लिखित शिकायत माननीय वन मंत्री, हरियाणा सरकार ( राव नरबीर सिंह) को भेजी गई थी।  वन मंत्री की इसी हरी झंडी के बाद विभाग ने तत्काल प्रभाव से कमेटी का गठन कर दिया।

इन 3 वरिष्ठ IFS अधिकारियों को सौंपी गई जाँच की कमान

इस गड़बड़ी को खंगालने के लिए विभाग ने तीन बेहद सीनियर अधिकारियों को मैदान में उतारा है:

  1. श्री अतुल सिरसकर, IFS (PCCF – बजट एवं योजना) – अध्यक्ष

  2. श्री आर. आनंद, IFS (CF – पश्चिम सर्कल, हिसार) – सदस्य

  3. श्री सुंदर लाल, IFS (DCF, रोहतक) – सदस्य

यह कमेटी रिकॉर्ड्स की हेरफेर, ट्रेनिंग सर्टिफिकेट्स में जालसाजी और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की कड़ाई से जाँच करेगी।

शिकायत में गंभीर आरोप: जांच ओर FIR दर्ज करने की मांग

शिकायतकर्ता जी. रमन, IFS (रिटायर्ड) द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों में कई अधिकारियों की शिकायत की गई है। शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act) के तहत सीधे FIR दर्ज करने की मांग की गई है।

शिकायत के मुख्य बिंदु और आरोप:

  • अनिवार्य ट्रेनिंग के बिना प्रमोशन: आरोप है कि कुछ डिप्टी रेंज ऑफिसर ने सरकार द्वारा तय अनिवार्य ट्रेनिंग (17.04.1998 की गजट नोटिफिकेशन के अनुसार) पूरी नहीं की थी। इसके बावजूद उन्हें नियमों के खिलाफ जाकर रेंज ऑफिसर बना दिया गया।

  •  योग्य अधिकारियों को कथित तौर पर जबरन डिमोट (पदावनत) किया गया ताकि इन चहेते अधिकारियों के लिए अवैध रास्ता बनाया जा सके।

  • वरिष्ठ IFS अधिकारियों पर उंगली: शिकायत में पूर्व और वर्तमान के कई बड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिन्होंने कथित तौर पर इन अवैध फायदों को अपनी मूक सहमति दी।

  • बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका: शिकायत के अनुसार, निचले कैडर के अधिकारियों को भी अवैध तरीके से प्रमोट किया गया।

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