धनौरा (यमुनानगर):
हिमाचल प्रदेश सीमा से सटे रणजीतपुर क्षेत्र के धनौरा गांव में धनौरा पुल के आसपास धड़ल्ले से चल रहे अवैध खनन पर बिलासपुर उपमंडल प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। बिलासपुर के एसडीएम डॉ. कुलदीप सिंह के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासन ने मौके पर त्वरित कार्रवाई करते हुए खनन माफिया के मंसूबों पर पानी फेर दिया है।
पुल से मात्र 200 फीट दूर हो रहा था अवैध खनन
प्राप्त शिकायत के आधार पर एसडीएम ने संबंधित विभाग, एनफोर्समेंट और सिंचाई विभाग के एसडीओ को तुरंत मौके का मुआयना करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सिंचाई विभाग के एसडीओ रवींद्र ने अपनी टीम के साथ मौके का दौरा किया। जांच के दौरान पुल के डाउन स्ट्रीम में महज 200 फीट की दूरी पर अवैध खनन के गहरे गड्ढे पाए गए, जिससे धनौरा पुल के अस्तित्व और सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा मंडराने लगा था।
जांच में सामने आया कि माफिया यहां से अवैध रूप से खनन सामग्री निकालकर आसपास के प्लांटों पर सप्लाई कर रहा था। एसडीओ ने तुरंत इसकी रिपोर्ट माइनिंग विभाग को सौंपते हुए जगह की पैमाइश करने और दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करवाने के लिखा। रिपोर्ट मिलते ही माइनिंग स्टाफ ने मौके पर पहुंचकर गड्ढों की पैमाइश की और बताया जाता है कि एफआईआर के लिए लिख दिया गया है।
गार्ड और पुलिस चौकी की मौजूदगी पर उठे सवालहैरान करने वाली बात यह है कि जिस ‘ग्राउंड जीरो’ पर अवैध खनन हो रहा था, वहां 500 से 1000 मीटर के दायरे में माइनिंग विभाग के गार्ड की नियमित ड्यूटी रहती है। इतना ही नहीं, घटनास्थल से महज एक से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर पुलिस चौकी भी स्थित है। इसके बावजूद लंबे समय से चल रहे अवैध खनन ने सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
“अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस, होगी सख्त कार्रवाई” — डॉ. कुलदीप सिंह (एसडीएम, बिलासपुर)
इस मामले पर बिलासपुर के एसडीएम डॉ. कुलदीप सिंह ने स्पष्ट कहा कि अवैध खनन में लिप्त लोगों से निपटने के लिए संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा, “प्रशासन के पास जहां से भी अवैध खनन की शिकायत आ रही है, उस पर तुरंत संज्ञान लेकर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”



