यमुनानगर। अवैध खनिज परिवहन को रोकने के लिए लगाए गए सरकारी नाकों पर प्राइवेट लोगों की डयूटी सीधा प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। यह प्राइवेट लोग एक रायल्टी फर्म के कर्मचारी बताए जाते है, ओर रायल्टी फर्में केवल खनिज ब्लाक पर कच्चे माल के रवाना व बिल जारी करती है ओर वहीं पर उसकी चेंकिग कर सकती है। मगर सरकारी नाकों पर इन रायल्टी फर्मों के कर्मचारी आखिर क्या कर रहे है अभी कुछ दिन पहले ही कुछ कर्मचारियों को सेलरी आदि न मिलने की वजह से उन्होंने नाकों पर किस तरह से वाहनों को निकलवाया जा रहा है उसकी चेट वायरल कर दी थी, जिसमें यूपीआई के स्क्रीनशाट भी शामिल थे।
इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा इसको गंभीरता से न लेना यह साबित कर रहा है दाल में काला नहीं पूरी दाल ही काली है। वहीं कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष का कहना है कि सरकारी नाकों पर प्राइवेट आदमियों का क्या काम है इसकी जांच होनी चाहिए। वहीं एसडीएम छछरौली का कहना है कि वह माइनिंग विभाग को कह कर इसकी जांच करवाते हैं।
अवैध खनिज परिवहन को लेकर पूरे जिले में सरकारी नाके लगाए गए हैं। इन नाकों पर पुलिस कर्मियों के अलावा कई विभागों के कर्मचारियों की शिफ्ट में डयूटी लगाई गई है। एक ओर उन्हें अपना आफिस का काम छोड़ कर यहां डयूटी देनी पड़ रही है वहीं दूसरी ओर गाड़ियों की चेकिंग का काम नाकों पर बैठे रायल्टी फर्में के कर्मचारी कर रहे है, यानी कहीं न कहीं ऐसा लगता है कि यह नाके रायल्टी फर्मों के लिए ही लगाए गए है।
जबकि नियमानुसार रायल्टी फर्म के कर्मचारी केवल खान या खनिज ब्लाक जहां से खनिज निकाला जाता है वहां पर ही चेकिंग कर सकते है, क्योंकि उनको अपनी फर्म का बिल या ई-रवाना देखना होता है कि वह वैध बिल से खनिज सामग्री किसी स्क्रीनिंग यूनिट या क्रशिंग यूनिट पर ले जा रहा है। अब उसके बाद तैयार माल पर संबधित यूनिट से बिल या ई-रवाना जारी हो रहा है या नहीं, यह काम संबधित विभाग का है, यानी खनन या उससे जुड़े विभागों का। मगर अब यह काम भी नाकों पर प्राइवेट लोग कर रहे हैं। ऐसे में सीधा-सीधा सा मतलब निकलता है कि नाके अवैध खनिज परिवहन को रोकने की बजाय रायल्टी फर्मों को लाभ पहुंचाने के लिए लगाए गए हैं।
इन लोकेशनस पर लगाए गए है नाके
सरकारी नाके ताजेवाला, भूड़कलां,जयधरी, नियर हाइडिल चेनल, अनाज मंडी चौंक छछरौली, ताहरपुर, असाहबपुर रोड नियर गुरुद्वारा नाका, दादुपुर हेड, शहजादपुर नाका, बहरामपुर चोक नाका, मुकारमपुर-बीबीपुर नाका, खानूवाला नाका, मुगलवाली चौंक नाका, सुल्तानपुर नाका, व्यासपुर नाका, पहाड़ीपुर नाका, सरांवा नाका, त्रिवेणी चौंक रादौर नाका, जठलाना नाका, गुमथला एरिया में लगाए गए हैं।
अभी कुछ दिन पहले नाकों पर बैठे प्राइवेट कर्मचारियों ने वहां पर चल रही गड़बड़ी व बिना बिल वाहन निकाले जाने को लेकर एक चेट वायरल कर दी थी, जिसमें यूपीआई के स्क्रीनशाट भी थे। ऐसे में क्या अधिकारियों को इसको गंभीरता से नहीं लेना चाहिए था।
उच्चस्तरीय जांच की जरुरत : जिलाध्यक्ष कांग्रेस
इस बारे में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष नरपाल सिंह गंदापुरा का कहना है कि सरकारी नाकों पर प्राइवेट लोगों का क्या काम है। यह पूरी तरह से गलत है। इसकी उच्चस्तरीय जांच की जरुरत है कि आखिर इसकी अनुमति किसने दी। रायल्टी फर्म के कर्मचारी तो केवल खनिज घाट एरिया में अपनी कंपनी के बिल जांच सकते है बाकी कोई गाड़ी कहां से माल ला रही है उसको चेक करना सरकार का काम है।
वहीं इस बारे में छछरौली के एसडीएम जसपाल सिंह गिल का कहना है कि वह माइनिंग विभाग को इस बारे में चेकिंग के लिए आदेश देंगे।





