-निलंबित डीडब्लयूएलओ राजेंद्र डांगी का कहना कि कलेसर रिपोर्ट में पिछले छह महीने से एक साल के बीच किसी कटान का जिक्र नहीं, इसके बावजूद जानबूझकर किया जा रहा है टारगेट
कलेसर, यमुनानगर। कलेसर वन्य जीव विहार में खैर के अवैध कटान मामले में निलंबित वन्य जीव निरीक्षक लीलू राम की चार्जशीट जारी कर दी गई है। पीसीसीएफ व चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन द्वारा जारी चार्जशीट में 4 आरोप लगाए गए हैं। यह आरोप पत्र 4 मई 2026 को चेकिंग कमेटी के चेयरमैन आईएफएस सुभाष यादव की रिपोर्ट के आधार पर जारी किया गया है। मगर सवाल यह है कि इस पूरी रिपोर्ट में कहीं भी ताजा कटान का जिक्र नहीं है। रिपोर्ट में जहां पर नए ठूंठों का जिक्र है उसमें भी कहा गया है कि यह ताजा ठूंठ या मुंडिया 2 वर्ष पुरानी हो सकती है। जबकि टेरिटोरियल से वाइल्ड लाइफ के पास यह एरिया मात्र छह से सात महीने पहले आया था। इस बारे में निलंबित डीडब्लयूएलओ राजेंद्र डांगी का का कहना है कटान चाहे आसरेवाली का हो या कलेसर का रिपोर्ट यह खुद साबित कर रही है कि वह वाइल्ड लाइफ विंग को एरिया ट्रांसफर होने से पहले का है जबकि टेरिटोरियल के किसी कर्मचारी से स्पष्टीकरण तक नहीं मांगा गया है।
कलेसर वन्य जीव विहार में अवैध कटान की जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद वन्य प्राणी विभाग की ओर से तत्कालीन वन्य जीव निरीक्षक (Wildlife Inspector) लीलू राम को ‘हरियाणा सिविल सेवा (दण्ड एवं अपील) नियमावली-2016’ के नियम-7 के तहत चार्जशीट (आरोप पत्र) जारी कर दिया है ।
जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा
कटान की जांच के लिए विभाग द्वारा मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव), गुरुग्राम, सुभाष चन्द्र यादव (भा.व.से.) की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया था । समिति ने 4 मई 2026 को अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपी।
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कुल 3,253 वृक्षों का अवैध कटान: जांच में सामने आया कि कलेसर वन्य जीव विहार से खैर प्रजाति के कुल 3,253 पेड़ों को अवैध रूप से काटा गया है ।
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पुराने और नए कटान: इन कटे हुए पेड़ों में 1,473 नए और 1,780 पुराने पेड़ शामिल हैं, जिससे साफ है कि यह अवैध कटान पिछले कई साल से चल रहा था।
वन्य जीव निरीक्षक पर लगे ये 4 गंभीर आरोप
चार्जशीट में वन्य जीव निरीक्षक लीलू राम पर मुख्य रूप से चार आरोप लगाए गए हैं:
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अवैध कटान रोकने में लापरवाही: कलेसर वन्य जीव विहार जैसे संरक्षित क्षेत्र में खैर के वृक्षों की कटाई को रोकने में लापरवाही का आरोप लगाया गया।
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वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम का उल्लंघन: इस संरक्षित क्षेत्र में वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 27 व 29 लागू है, जिसके तहत पेड़ों के कटान और उन्हें बाहर ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध है, जिसका उल्लंघन हुआ ।
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निगरानी और गश्त में विफलता: अधिकार क्षेत्र के संवेदनशील वन क्षेत्रों का समय-समय पर नियमित निरीक्षण और क्षेत्रीय गश्त करने में विफलता का आरोप लगाया गया है।
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अधीनस्थ स्टाफ पर नियंत्रण खोना: उनके अधीन तैनात स्टाफ पर नियंत्रण न होने का आरोप
21 दिन के भीतर देना होगा जवाब
इस आरोप पत्र में लीलू राम को 21 दिन के अंदर जवाब देने को कहा गया है। समय पर जवाब न देने पर यह समझा जाएगा कि निलंबित निरीक्षक कोई स्पष्टीकरण नहीं देना चाहता।
रिपोर्ट कहीं भी पिछले छह माह से एक साल के बीच कटान की पुष्टि नहीं
एक ओर वन्य प्राणी विभाग की ओर से निलंबित निरीक्षक को कलेसर वन्य प्राणी विहार में हुए अवैध कटान के मामले में चार्जशीट जारी की गई है, वहीं दूसरी ओर अवैध कटान के मामले में जो रिपोर्ट सौंपी गई है, उसमें कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि अवैध कटान वाइल्ड लाइफ विभाग को एरिया ट्रांसफर के बाद हुआ।
टीम लीडर द्वारा विभाग को सौंपी गई रिपोर्ट
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रिपोर्ट किए गए पुराने ठूंठ (old stumps), ठूंठों की उम्र और पेड़ कटान की अवधि पर ध्यान दिए बिना दर्ज किए गए हैं। यहाँ तक कि घिसे-पिटे/क्षरित हो चुके (eroded) ठूंठ, जो कि 10 वर्ष से अधिक पुराने हो सकते हैं, उन्हें भी रिपोर्ट में दर्ज किया गया है।
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टीम लीडरों द्वारा रिपोर्ट किए गए नए ठूंठ (new stumps) भी ठूंठों की उम्र और उनके कटान की अवधि पर ध्यान दिए बिना दर्ज किए गए हैं। ये (नए बताए गए ठूंठ) दो (02) वर्ष तक पुराने भी हो सकते हैं, क्योंकि कुछ स्थानों पर कुल्हाड़ी से कुछ ठूंठों की जांच की, तो इन ठूंठों में कोई ‘सैपवुड’ (sapwood – पेड़ की बाहरी जीवित लकड़ी) नहीं पाई गई।
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यह विशेष रूप से (critically) रिपोर्ट किया जाता है कि यह नहीं कहा जा सकता कि टीमों द्वारा रिपोर्ट किए गए ये नए ठूंठ उन्हीं पेड़ों के हैं, जिन्हें वन्यजीव विंग (Wildlife Wing) को क्षेत्र सौंपने के बाद काटा गया है।
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फील्ड चेकिंग के दौरान, खोदकर गिराए गए पेड़ों के ठूंठों को हटाने की घटनाएं भी पाई गईं, लेकिन ये पुराने ठूंठ थे क्योंकि कुल्हाड़ी से तृतीयक जड़ों (tertiary roots) की जांच करने पर वे सूखी पाई गईं। यह मामला कांसली (Kansali) और चिकन बीट (Chiken Beat) में पाया गया।
इस मामले में तत्कालीन डीडब्लयूएलओ राजेंद्र डांगी जिनको निलंबित कर दिया गया था, उन्होंने विभाग व सरकार को पत्र भेजकर इस कटान मामले में साजिश का आरोप लगाया व तथ्यों के साथ अपनी बात कही थी। उन्होंने कहा कलेसर रिपोर्ट में तो स्पष्ट रुप से कहा गया है, पिछले छह महीने से एक साल के बीच कटान के कोई सबूत नहीं है। कहीं पर अगर कटान हुआ तो उसको कंपाऊड करने की बजाय कार्रवाई की गई है, इसकी सारी रिपोर्ट चेकिंग टीम को सौंपी गई।
- जबकि यह एरिया वाइल्ड लाइफ विभाग के पास जांच शुरु से पहले लगभग छह से सात महीने पहले आया था। ऐसे ऐसे में कटान की पूरी जिम्मेदारी उससे पहले टेरिटोरियल की बनती है, क्योंकि यह एरिया शुरु से उनके पास था। उन्होंने कहा कि जब रिपोर्ट में पिछले दस साल से कटान का जिक्र है तो क्या टेरिटोरियल के किसी गार्ड, दरोगा या अन्य अधिकारी से स्पष्टीकरण भी मांगा गया। उन्होंने कहा यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि इस मामले में कलेसर वन्य जीव निरीक्षक को टारगेट किया जा रहा है। जो कि पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि चेकिंग रिपेार्ट से लेकर पूरा रिकार्ड उनकी सच्चाई को ब्यान कर रहा है।





