कलेसर (यमुनानगर):
हाईकोर्ट की सख्त पाबंदी और महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित वन विभाग की चौकी के बावजूद खैर तस्करों के हौसले पस्त होने का नाम नहीं ले रहे हैं। फॉरेस्ट डिवीजन यमुनानगर की कलेसर रेंज के ताजेवाला ब्लॉक स्थित भूड़ बीट से शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात खैर के चार पुराने और कीमती पेड़ काटकर तस्करी कर लिए गए। घटना भूड़कलां से डांडीपुर जाने वाले कच्चे रास्ते के पास की है।

चौंकाने वाली बात यह है कि हरियाणा हाईकोर्ट ने अप्रैल 2026 में एक मामले की सुनवाई के दौरान प्रदेशभर में सरकारी और निजी हर प्रकार के पेड़ों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। यह रोक वर्तमान में भी लागू है, लेकिन धरातल पर तस्करों और बेपरवाह विभागों के आगे अदालती आदेश बौने साबित हो रहे हैं।
जांच के नाम पर खानापूर्ति, नंबरिंग कर झाड़ा पल्ला
शनिवार सुबह अवैध कटान की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर जरूर पहुंची, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ पेड़ों के ठूंठ (मुंडियों) पर नंबरिंग करके खानापूर्ति कर ली गई। यह जमीन हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPGCL) के अधीन आती है, हालांकि यहां पौधारोपण वन विभाग ने ही किया हुआ है। इसके बावजूद वन विभाग के कर्मचारियों ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि HPGCL के अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है और आगे की FIR दर्ज कराने की जिम्मेदारी उनके SDO की है।

अधिकारियों के नाक के नीचे चल रहा अवैध कटान का खेल
यह पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र में लकड़ी तस्करी की घटना हुई हो; HPGCL के इस एरिया से लंबे समय से अवैध कटान की शिकायतें आ रही हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस जगह से कटान हुआ, वहां से HPGCL का कार्यालय (जहां XEN और SDO बैठते हैं) मात्र डेढ़ किलोमीटर और वन विभाग की चौकी महज 500 मीटर दूर है।
अधिकारियों की इतनी नजदीकी के बावजूद रात के अंधेरे में बेखौफ होकर इतने बड़े पेड़ों को काट ले जाना सुरक्षा व्यवस्था और दोनों विभागों के तालमेल पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय निवासियों में विभागों की इस ढुलमुल कार्यशैली को लेकर भारी रोष है।
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