पंचकूला: हरियाणा वन विकास निगम की कार्यप्रणाली को और अधिक सुदृढ़ और मुनाफेदार बनाने के लिए निदेशालय में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता निगम के चेयरमैन रवि सैनी ने की। इस बैठक में निगम के सभी मुख्य महाप्रबन्धकों एवं महाप्रबन्धकों ने हिस्सा लिया और भविष्य की रणनीतियों पर कई अहम फैसले लिए गए।

बैठक की शुरुआत में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं प्रबन्ध निदेशक डॉ. के. सी. मीणा ने चेयरमैन का स्वागत किया और उन्हें निगम की वर्तमान गतिविधियों, जारी कार्यों तथा उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

बिजनेस विस्तार और वित्तीय लाभ पर फोकस

समीक्षा बैठक के दौरान चेयरमैन रवि सैनी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निगम की गतिविधियों का और अधिक विस्तार किया जाए। उन्होंने कहा:

“निगम की सभी यूनिटें अधिकतम वित्तीय लाभ (राजस्व) अर्जित करने के लिए प्रभावी प्रयास करें। यदि इसके लिए आवश्यकता पड़े, तो अन्य राज्यों के वन विकास निगमों की कार्यप्रणाली का अध्ययन कर वहां से भी जरूरी जानकारी और अनुभव साझा किए जाएं।”

सरकारी विभागों से फर्नीचर ऑर्डर और NCR में नई इकाई की संभावनाएं

चेयरमैन ने निगम द्वारा निर्मित फर्नीचर की गुणवत्ता से समझौता न करने की बात कही। उन्होंने निर्देश दिए कि:

  • विभिन्न सरकारी विभागों, विद्यालयों और महाविद्यालयों से फर्नीचर के ऑर्डर हासिल करने के लिए अधिकारी व्यक्तिगत स्तर पर तालमेल और संपर्क स्थापित करें।

  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में निगम की एक नई फर्नीचर निर्माण इकाई (Manufacturing Unit) स्थापित करने की संभावनाओं का भी बारीकी से अध्ययन किया जाए।

ई-ऑक्शन में पारदर्शिता और किसानों को उचित मूल्य

बैठक में लकड़ी के व्यापार को पारदर्शी बनाने पर भी विशेष चर्चा हुई। चेयरमैन ने कहा कि लकड़ी की नीलामी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी होनी चाहिए और इसके लिए नियमित रूप से ई-ऑक्शन (e-Auction) के माध्यम से नीलामी आयोजित की जाए।

इसके साथ ही, किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि खेतों में खड़े वृक्षों की लकड़ी के न्यूनतम क्रय मूल्य का समय-समय पर पुनरीक्षण (Review) किया जाए। इससे किसानों को उनकी उपज का सही और उचित मूल्य मिल सकेगा, जिससे अधिक से अधिक किसान निगम के साथ जुड़ने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

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