अंबाला: अंबाला पुलिस की एंटी व्हीकल थेफ्ट (AVT) सेल ने वाहन चोरों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने हरियाणा के अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में आतंक मचाने वाले एक शातिर अंतरराज्यीय बाइक चोर को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अनिल (निवासी बिलासपुर) के रूप में हुई है। पुलिस अब तक उसके कब्जे से चोरी की 20 मोटरसाइकिलें बरामद कर चुकी है।

ऐसे जाल में फंसा शातिर चोर

डीएसपी अंबाला, जगबीर मलिक ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि अंबाला शहर, महेश नगर और अंबाला छावनी क्षेत्रों में पिछले काफी समय से बाइक चोरी की वारदातें बढ़ रही थीं। इन पर अंकुश लगाने के लिए AVT सेल को सक्रिय किया गया था।

निरीक्षक ऋषिपाल सिंह के नेतृत्व में गठित टीम (जिसमें एएसआई कंवल जीत सिंह, एएसआई देवेंद्र कुमार, हेड कांस्टेबल महाबीर सिंह और कांस्टेबल विनोद कुमार शामिल थे) ने गुप्त सूचना के आधार पर मुस्तैदी से नाकाबंदी की। इस दौरान टीम ने संदिग्ध अनिल को धर दबोचा। शुरुआती तलाशी में ही उसके पास से महेश नगर थाने से चोरी हुई एक बाइक बरामद हुई।

35 वारदातों का खुलासा, सहारनपुर जेल में काट चुका है सजा

पुलिस पूछताछ में आरोपी ने करीब तीन दर्जन (35) बाइक चोरी की वारदातों को अंजाम देने की बात कबूली है। वह इन बाइकों को चुराने के बाद उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ले जाकर औने-पौने दामों में बेच देता था। आरोपी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी है; वह पहले भी वाहन चोरी के मामले में सहारनपुर जेल में करीब 18 महीने की सजा काट चुका है।

मजबूरी से अपराध का सफर: फाइनेंसर से बना चोर

पूछताछ में आरोपी अनिल ने चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि वह पहले फाइनेंस का कारोबार करता था। लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान उसका धंधा पूरी तरह ठप हो गया और वह भारी कर्ज में डूब गया। कर्जदारों और देनदारी से बचने के लिए उसने अपना घर छोड़ दिया। पुलिस और लेनदारों से अपनी पहचान छिपाने के लिए वह अक्सर मंदिरों और गुरुद्वारों में ठहरता था और बाइक चोरी का नया धंधा शुरू कर दिया।

सघन पूछताछ जारी, पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करेगी पुलिस डीएसपी जगबीर मलिक के अनुसार, “आरोपी अनिल को अदालत में पेश कर 6 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। रिमांड के दौरान करीब 15 और बाइक बरामद होने की पूरी उम्मीद है। इसके साथ ही सहारनपुर में उन लोगों (कबाड़ियों/खरीददारों) की पहचान की जा रही है जो ये गाड़ियां खरीदते थे, ताकि इस पूरे सिंडिकेट को नेस्तनाबूद किया जा सके।”

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