चंडीगढ़: हरियाणा के खान एवं भूविज्ञान विभाग में ई-रवाना और HMGIS पोर्टल के संभावित दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। विभाग की आंतरिक जांच और डेटा विश्लेषण में यह पाया गया है कि प्रदेश की कई स्क्रीनिंग और क्रशिंग इकाइयां बिना कच्चा माल खरीदे ही लाखों टन खनिज खुले बाजार में बेच दिया है।
अवैध खनन को वैध बनाने का खेल?
यह पूरा मामला 7 अप्रैल 2026 को वरिष्ठ अधिकारियों की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान उजागर हुआ। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कई इकाइयां पोर्टल पर अपनी कच्चे माल की खरीद शून्य (Zero Purchase) दिखा रही हैं, लेकिन उनके द्वारा बेचे गए तैयार माल की मात्रा हजारों मीट्रिक टन में है। यह विसंगति इस बात का पुख्ता संकेत देती है कि अवैध रूप से खनन किए गए पत्थरों और खनिजों को पोर्टल के जरिए ‘कागजी खानापूर्ति’ करके बेच दिया गया।
जांच में सामने आए मुख्य तथ्य:
दस्तावेजों के अनुसार, प्रदेश भर की कुल 15 संदिग्ध इकाइयों ने मिलकर लगभग 7,78,220 MT खनिज बिना किसी वैध खरीद रिकॉर्ड के बेचा है। जिसमें जिला यमुनानगर, चरखीदादरी, सोनीपत, भिवानी व पंचकूला की ईकाईयां शामिल है। बताया जाता है कि इन ईकाईयों के पोर्टल बंद कर दिए गए हैं ओर जांच जारी है।
लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश
इन सभी दोषी इकाइयों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सरकारी पोर्टल का दुरुपयोग करने वाली इन संस्थाओं के लाइसेंस तुरंत निलंबित या रद्द (Suspension/Termination) किए जाने चाहिए।





