प्रतापनगर, यमुनानगर। अनाज मंंडी प्रतापनगर में धड़ल्ले से यूपी व अन्य राज्यों से गेहूं आ रही है। मंडी में बिना नंबर व नंबर के साथ यूपी के वाहन खड़े दिखाई देते है। उतरप्रदेश बार्डर के साथ लगते एरिया में यमुना नदी के बीच के रास्तों से लगातार यूपी की ट्रालियां प्रतापनगर की ओर आती दिखाई देती हैं। सरकार की रोक व सख्ती के बावजूद प्रतापनगर मंडी में इसका कोई असर नहीं है। मंडी के सचिव का कहना है कि उनकी जानकारी में नहीं है वह पता करवाते हैं। वहीं भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के जिलाध्यक्ष का कहना है कि मिलीभगत से यह खेल चल रहा है जिसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।

फसल खरीद पोर्टल के माध्यम से अब की बार सरकार ने मंडी के अंदर एंट्री लेने वाले वाहनों पर रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित होने को अनिवार्य बनाया। इसके साथ ही मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य पहले से ही है। ताकि बाहरी राज्यों की फसल यहां पर न आ सके। मगर प्रतापनगर मंडी में सभी नियमों कानूनों को तार-तार किया जा रहा है। यहां पर दिन भर यूपी व अन्य राज्यों से गेहूं की भरी ट्रालियां मंंडी में आ रही है।

जहां पर सरेआम फसल को तोला जा रहा है, आखिर बिना मिलीभगत से यह कैसे संभव हो सकता है। यूपी बार्डर से लगी यमुना नदी से तड़के ही ट्रैक्टर-ट्रालियों का काफिला मंडी में आना शुरु हो जाता है। बुधवार को छछरौली में भी बाहरी राज्य से गेहूं से लदी एक ट्रैक्टर-ट्राली को किसान यूनियन ने काबू किया व पुलिस को सौंप दिया था। मगर प्रतापनगर में यूपी से लगातार गेहूं आ रही है।

मंडी में यूपी से आई अधिकतर ट्रालियों पर नंबर अंकित नहीं, मगर टैंपो व छोटे वाहनों पर लगा है यूपी नंबर

अनाज मंडी प्रतापनगर में अधिकतर यूपी से आई ट्रैक्टर-ट्रालियों पर नंबर अंकित नहीं है। मगर देखने से साफ प्रतीत होता है कि यह ट्रालियां यूपी है। जिन पर किसी पर चिलकाना किसी पर बेहट अंकित है। इसके साथ ही सबसे बड़ा सवाल यह है कि हरियाणा नंबर की सभी ट्रालियों पर रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित है तो आखिर यूपी से आई गेहूं से भरी ट्रैक्टर-ट्रालियों पर रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित क्यों नहीं है। छोटे वाहन जैसे टैंपो आदि पर यूपी व यूके के नंबर अंकित है। वीरवार दोपहर को जब यूपी नंबर का गेहूं से भरा वाहन जब मंडी में जाने लगा तो मीडिया कर्मी द्वारा वीडियो बनाता देख उस वाहन को वापस मोड़ दिया गया। मगर वह वाहन लगभग आधा घंटा मंडी के बाहर ही खड़ा रहा, यानी कहीं न कही किसी न किसी कमीशन एजेंट के पास वह जा ही रहा था।

अगर पोर्टल के नियम कानूनों का पालन नहीं कराना तो आखिर स्थानीय किसानों के लिए क्यों है औपचारिकताएं

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर बिना रजिस्ट्रेशन के कोई गेहूं आ नहीं सकती। इसके बावजूद यूपी से गेहूं आ रहा है तो आखिर स्थानीय किसानों के लिए रजिस्ट्रेशन व अन्य सिरदर्दी क्यों। स्थानीय किसान अपने वाहनों पर रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित करवा रहे है पोर्टल पर फसल का ब्यौरा दे रहे है। इसके बावजूद बाहरी राज्यों का गेहूं खरीदना है तो आखिर यह औपचारिकताएं क्यों रखी जा रही है।

मिलीभगत से आ रही है गेहूं, कार्रवाई होनी चाहिए : बीकेयू शहीद भगत सिंह

भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के जिला प्रधान जसप्रीत सिंह बलौली ने कहा कि उन्होंने रात को छछरौली में एक फर्जी नंबर की ट्रैक्टर-ट्राली पकड़ी, जिसमें गेहूं लदी थी। उन्होंने इसको पुलिस को सौंप दिया था। मगर प्रतापनगर मंडी में भी मिलीभगत से यही खेल चल रहा है। लोकल एरिया में तो गेहूं लगभग मंडी में पहुंच चुकी है अब जितनी भी गेहूं आ रही वह बाहरी राज्यों की है इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

मंडी सचिव का कहना है कि घर के लिए निकल गया हूं, जानकारी नहीं है पता करवाता हूं

छछरौली मंडी के सचिव रिषी राज का कहना है कि वह अब अपने घर के लिए निकल गए है यानी घर जा रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि यूपी व अन्य राज्यों की गेहूं क्यों आ रही है तो उनका कहना था कि उन्हें जानकारी नहीं है वह पता करवाते हैं।

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