अगस्त में सांगवान के पेड़ों के कटान के बाद अब सड़क किनारे प्लांटेशन बनी निशाना, मौके पर मिले ताजे कटे ठूंठ और लकड़ी के अवशेष

आदिबद्री, यमुनानगर। आदिबद्री श्राइन बोर्ड की जमीन पर पेड़ों के अवैध कटान का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अगस्त माह में सांगवान के पेड़ों के कटान का मामला सामने आने के बाद अब सितंबर की शुरुआत में सड़क किनारे लगी सफेदे की प्लांटेशन से करीब 10 से 12 पेड़ काटे जाने का मामला सामने आया है। मौके की तस्वीरों में पेड़ों के ताजे कटे हुए ठूंठ और आसपास बिखरी लकड़ी के अवशेष साफ दिखाई दे रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार पेड़ों का यह कटान आसपास के लोगों द्वारा किया जा रहा है। उनका कहना है कि श्राइन बोर्ड की जमीन से लगातार पेड़ काटे जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से अवैध कटान करने वालों के हौसले बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इसका सीधा नुकसान श्राइन बोर्ड की संपत्ति और पर्यावरण को हो रहा है।

पहले सांगवान, अब सफेदा

श्राइन बोर्ड की जमीन पर पेड़ों के कटान का यह नया मामला उस समय सामने आया है, जब अगस्त में इसी जमीन से सांगवान के पेड़ों के काटे जाने की शिकायत सामने आई थी। उस मामले के बाद भी यदि प्लांटेशन में दोबारा पेड़ों की कटाई हो गई तो इससे श्राइन बोर्ड की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

इस बार सड़क किनारे की सफेदे की प्लांटेशन में करीब 10 से 12 पेड़ काटे जाने की बात सामने आई है। मौके पर मिले ठूंठों और लकड़ी के टुकड़ों से कटान की स्थिति स्पष्ट नजर आ रही है।

तस्वीरें बता रही हैं कटान की कहानी

मौके से सामने आई तस्वीरों में जमीन के बीच पेड़ों के कटे हुए ठूंठ दिखाई दे रहे हैं। कुछ ठूंठों के आसपास ताजा लकड़ी के चिप्स और छाल के टुकड़े भी पड़े हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पेड़ों को काटने के बाद लकड़ी को मौके से हटाया गया है।

स्टाफ की निगरानी पर सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि श्राइन बोर्ड की जमीन पर पेड़ों की सुरक्षा की जिम्मेदारी बोर्ड के स्टाफ की है। इसके बावजूद लगातार दूसरी बार पेड़ों के कटान की घटना सामने आना निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की मौके पर जांच कराई जाए, काटे गए पेड़ों की संख्या और लकड़ी की मात्रा का आकलन किया जाए तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

हाईकोर्ट ने भी पेड़ कटान पर लगाई है रोक

हरियाणा में पेड़ों की कटाई को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अप्रैल 2026 में सख्त रुख अपनाते हुए हरियाणा में पेड़ काटने के लिए आगामी आदेशों तक रोक लगाई थी।

अब सवाल यह है कि अगस्त में सांगवान और सितंबर की शुरुआत में सफेदे के पेड़ों के कटान के बाद भी अगर श्राइन बोर्ड की जमीन सुरक्षित नहीं है, तो आखिर कैसे पर्यावरण व जंगल को बचाया जा सकता है।

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