पंचकूला । जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) की टीम ने पंचकूला के अर्बन एरिया में अवैध निर्माणों और अनधिकृत कॉलोनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। डीटीपी बबिता गुप्ता के नेतृत्व में चलाए गए इस तोड़फोड़ अभियान के दौरान गांव चरनियां, कोना और लहरोंडी स्थित अवैध कॉलोनियों में बने कई अवैध ढांचों और रोड नेटवर्क को जेसीबी (JCB) मशीन की सहायता से पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया।
कहाँ-कहाँ और क्या हुई कार्रवाई?
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गांव चरनियां: 4 डीपीसी (DPC) ध्वस्त की गईं।
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गांव कोना: 9 डीपीसी को गिराया गया।
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गांव लहरोंडी: 3 डीपीसी पर पीला पंजा चला।
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अन्य कार्रवाई: इसके अतिरिक्त इन अवैध कॉलोनियों में अवैध रूप से बनाए गए रोड नेटवर्क और प्लॉटिंग के लिए की गई निशानदेही को भी जेसीबी की मदद से उखाड़कर हटा दिया गया।
मौके पर कौन-कौन रहा मौजूद?
यह पूरी कार्रवाई जिला नगर योजनाकार (DTP) बबिता गुप्ता, ड्यूटी मजिस्ट्रेट डिम्पी राठी, सहायक नगर योजनाकार (ATP) अशोक कुमार तथा भारी पुलिस बल की मौजूदगी और कड़े पहरे में शांतिपूर्वक संपन्न हुई।
बिना अनुमति निर्माण न करने की अपील: जानकारी देते हुए डीटीपी बबिता गुप्ता ने बताया कि किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करने अथवा कॉलोनी विकसित करने से पहले ‘निदेशक, नगर तथा ग्राम आयोजना विभाग, हरियाणा’ से आवश्यक अनुमति (CLU/लाइसेंस) प्राप्त करना अनिवार्य है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि बिना अनुमति किसी अनधिकृत कॉलोनी का विकास या निर्माण न करें। यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति के अवैध निर्माण करता है या कॉलोनी विकसित करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
खबर का दूसरा पहलू: कार्रवाई की प्रेस रिलीज में खसरा और हदबस्त नंबर न होना उठा रहा सवाल
एक तरफ जहाँ विभाग अवैध निर्माणों के खिलाफ लगातार कार्रवाई का दावा करता है, वहीं दूसरी तरफ विभाग द्वारा जारी प्रेस रिलीज में पूरी पारदर्शिता न दिखने को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है।
नगर योजनाकार विभाग प्रेस रिलीज तो जारी करता है, मगर इसमें जिस जगह कार्रवाई की गई है, उस क्षेत्र के हदबस्त नंबर और खसरा नंबरों की जानकारी देने से गुरेज करता है।
पारदर्शिता न होने से क्यों बढ़ रही है आम जनता की परेशानी?
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दूर-दराज के लोग बनते हैं झांसे का शिकार: पंचकूला जैसे शहर और इसके आसपास के इलाकों में प्लॉट आदि खरीदने वाले केवल स्थानीय लोग ही नहीं होते, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग आते हैं। सटीक खसरा नंबर न होने से वे भू-माफियाओं के झांसे में आसानी से फंस जाते हैं।
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गाढ़ी कमाई फंसने का डर: जब तक विभाग खसरा नंबर सार्वजनिक नहीं करेगा, तब तक आम लोगों को यह पता नहीं चल पाएगा कि कौन सा प्लॉट या जमीन अवैध श्रेणी में आती है, जिससे लोग अपनी मेहनत का पैसा गंवा बैठते हैं।
जानकारों का मानना है कि नगर योजनाकार विभाग को चाहिए कि वह जिस भी क्षेत्र में तोड़फोड़ या कार्रवाई करे, उसके खसरा नंबर और हदबस्त नंबर प्रेस रिलीज में अनिवार्य रूप से जारी करे, ताकि आम लोग ऐसी अवैध कॉलोनियों में अपना पैसा फंसाने से बच सकें।


