छछरौली,यमुनानगर।
यमुनानगर जिले के प्रतापनगर को ब्लॉक (खंड) का दर्जा मिले आठ साल का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन यहां के निवासियों और 54 पंचायतों का विकास आज भी एक स्थाई खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी की बाट जोह रहा है। ब्लॉक बनने के बाद से लेकर अब तक यहां अधिकतर समय ब्लॉक डेवलपमेंट एंड पंचायत ऑफिसर (BDPO) का पद खाली ही पड़ा रहा है। स्थाई अधिकारी की तैनाती न होने के कारण छछरौली के बीडीपीओ को प्रतापनगर का अतिरिक्त प्रभार (अडिशनल चार्ज) देकर काम चलाया जा रहा है।
सच्चाई यह है कि जुगाड़ के भरोसे चल रहे इस ब्लॉक में आम जनता और पंचायत प्रतिनिधि दोनों बुरी तरह परेशान हैं।

54 पंचायतों का कामकाज प्रभावित

प्रतापनगर ब्लॉक के अंतर्गत कुल 54 ग्राम पंचायतें आती हैं। स्थाई बीडीपीओ न होने की वजह से गांवों में होने वाले विकास कार्यों की गति बेहद धीमी हो चुकी है। पंचायतों के विकास कार्याें से लेकर अन्य कामों के लिए बार-बार छछरौली धक्के खाने पड़ते हैं।

छोटे-छोटे कामों और दस्तखत के लिए छछरौली की दौड़

स्थाई अधिकारी न होने का सबसे बड़ा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों को:
  • विकास व कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े सत्यापन,
  • बीडीपीओ के हस्ताक्षर/मोहर की जरूरत वाले मामूली दस्तावेजों के लिए
प्रतापनगर से छछरौली के चक्कर काटने पड़ते हैं। कई बार छछरौली जाने पर भी अधिकारी के अन्य बैठकों में व्यस्त होने या प्रतापनगर में दौरे पर होने के कारण ग्रामीणों को बिना काम कराए ही खाली हाथ लौटना पड़ता है। इससे लोगों के समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है।

प्रशासनिक उपेक्षा पर उठ रहे सवाल

आठ साल पहले जब प्रतापनगर को ब्लॉक का दर्जा दिया गया था, तो क्षेत्र के लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें प्रशासनिक कामों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और इलाके में तेजी से विकास होगा। लेकिन सालों बाद भी बुनियादी ढांचे और स्थाई प्रशासनिक अमले की कमी ने इस ब्लॉक के वजूद पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्षेत्रीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों ने प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि प्रतापनगर ब्लॉक में जल्द से जल्द स्थाई बीडीपीओ की नियुक्ति की जाए, ताकि 54 पंचायतों में विकास की रफ्तार तेज हो सके और आम जनता को मानसिक व शारीरिक परेशानी से राहत मिले।
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