– पीसीसीएफ ने स्वंय किया था मौके का दौरा, मगर विभागीय कार्रवाई के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं

प्रतापनगर | प्रतापनगर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कलेसर की खैरवैली में खैर के कीमती पेड़ों पर वन माफिया द्वारा कुल्हाड़ी चलाने के मामले में खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी ने पुलिस को पत्र लिखकर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा हैं।  सरकारी भूमि पर वर्षों से 40 से 50 साल पुराने खैर के पेड़ों को अवैध रूप से काटकर पंचायत को लाखों रुपये की वित्तीय चपत लगाई गई है। वहीं कलेसर के वन राजिक अधिकारी को भी पत्र भेजकर पेड़ों की मूल्यांकन रिपोर्ट व जांच रिपोर्ट देने को कहा गया है। इस मामले में पीसीसीएफ ने भी मौके का दौरा किया था, मगर विभागीय जांच में क्या हुआ किसी को पता नहीं है।

सूत्रों के अनुसार, कलेसर की ‘खैरवैली’ स्थित शामलात भूमि पर वन विभाग की देखरेख में खड़े खैर के पेड़ों को बड़ी संख्या में इसी माह काट लिया गया। यमुनापोस्ट ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। जिसके बाद 4 अप्रैल 2026 को ग्राम पंचायत को सूचना मिली कि वहाँ अवैध तरीके से पेड़ों की कटाई की जा रही है। जब सरपंच प्रतिनिधि और पंचायत चौकीदार ने मौके पर पहुँचकर निरीक्षण किया, तो वहां का दृश्य हैरान करने वाला था। भारी संख्या में कीमती खैर के पेड़ काटे जा चुके थे और कई जगह तो पेड़ों को जड़ से उखाड़कर उनके अवशेष मिटाने की कोशिश भी की गई थी।

जांच में हेरफेर की आशंका: रातों-रात लग गए पेड़ों पर नंबर

इस पूरे प्रकरण में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि 4 अप्रैल को जब पहली बार निरीक्षण हुआ, तो कटे हुए पेड़ों पर वन विभाग का कोई सरकारी नंबर नहीं था। 6 अप्रैल को जब दोबारा मौका मुआयना किया गया, तो जिन पेड़ों पर पहले नंबर नहीं थे, उन पर नंबर अंकित पाए गए। पंचायत का आरोप है कि वन विभाग द्वारा लगाई गई छान के पास भी कुछ पेड़ कटे पाए गए, और बार-बार शिकायत के बावजूद वन विभाग द्वारा ग्राम पंचायत को कोई संतोषजनक जानकारी नहीं दी जा रही है।

पर्यावरण और राजस्व का बड़ा नुकसान

बीडीपीओ प्रतापनगर ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि इस अवैध कटान से न केवल पर्यावरण को बहुत अधिक क्षति हुई है, बल्कि ग्राम पंचायत के राजस्व को भी भारी नुकसान पहुँचा है। पंचायत ने 19 जून 2023 को एक प्रस्ताव पारित कर यहाँ चौकीदार की नियुक्ति के लिए वन विभाग को पत्र भी लिखा था, ताकि इन पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

बीडीपीओ द्वारा रेंज अधिकारी को भी पत्र क्रमांक 1924 दिनांक 9 अप्रैल 2026 के माध्यम से काटे गए पेड़ों की मूल्यांकन रिपोर्ट देने को कहा गया है। पत्र में कहा गया है कि ग्राम पंचायत कलेसर की इस जमीन पर पिछले 40 से 50 वर्ष से खैर के पेड़ खड़े हैं। इन पेड़ों को वन विभाग द्वारा लगवाया गया था। इसकी देखभाल का कार्य भी आपके विभाग द्वारा किया जा रहा है। 4 अप्रैल को सूचना के बाद जब सरपंच प्रतिनिधि व गांव के चौकीदार ने मौके पर जाकर देखा तो उक्त क्षेत्र में खैर का अवैध कटान पाया गया। इस दौरान चेकिंग करने पर पाया कि वहां पर मुंडियों पर कोई नंबर नहीं लगा था, जबकि 6 अप्रैल 2026 को दोबारा मौका निरीक्षण किया गया तब पाया गया कि जिन मुंडियो पर 4 अप्रैल को नंबर नहीं लगे थे, उन पर विभाग द्वारा नंबर लगाए गए हैं। लगातार हो रहे कटान की सूचना आपके विभाग द्वारा नहीं दी जा रही है न ही अवैध कटान बंद हो रहा है। जिससे ग्राम पंचायत को लगातार वितिय हानी हो रही है।

अब सवाल यह है कि एक ओर विभाग इसे पंचायत की जमीन बता कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता है दूसरी ओर वहां पर नंबरिग करना यानी उसकी डैमेज रिपोर्ट बनाता है ऐसे में आखिर माजरा क्या है। 5 अप्रैल को 2026 को पीसीसीएफ केसी मीणा ने भी मौके का दौरा किया था, मगर आज तक विभागीय क्या कार्रवाई हुई इसकी जानकारी किसी को नहीं है।

पुलिस और उच्च अधिकारियों को दी गई रिपोर्ट

पुलिस को दी गई शिकायत में मांग की गई है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषी व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। इस मामले की प्रतिलिपि उपायुक्त यमुनानगर और जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी को भी भेजी गई है ताकि मामले की निगरानी उच्च स्तर पर की जा सके।

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