यमुनानगर। एक ओर सरकार प्रदेश को हरा-भरा बनाने के लिए उच्च स्तरीय बैठकें कर ‘प्लांटेशन ड्राइव’ के खाके तैयार कर रही है, वहीं दूसरी ओर यमुनानगर के लेदी-बिलासपुर रोड पर खानूवाला साइड की पटरी पर लगी शीशम की प्लांटेशन प्रशासनिक उपेक्षा की भेंट चढ़ रही है। यहाँ लगभग 500 मीटर से एक किलोमीटर के दायरे में बड़े पैमाने पर अवैध कटान हुआ है, जिससे कई जगह पटरी अब पेड़ों से खाली हो चुकी है।
सीमा विवाद और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते विभाग हैरानी की बात यह है कि पेड़ों की सुरक्षा को लेकर कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। यह पूरा क्षेत्र सेक्शन चार (Section 4) के अंतर्गत आता है, इसके बावजूद वन विभाग और ग्राम पंचायत के बीच तालमेल का अभाव स्पष्ट दिख रहा है।
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वन विभाग (बिलासपुर स्टाफ): इनका तर्क है कि तीन-चार साल पहले की गई प्लांटेशन को पंचायत को हैंडओवर कर दिया गया है।
- छछरौली रेंज के स्टाफ का कहना है यह एरिया उनके कार्यक्षेत्र में नहीं पड़ता
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ग्राम पंचायत खानूवाला: सरपंच प्रतिनिधि का दावा है कि यह क्षेत्र ‘मलिकपुर बांगर’ की सीमा में आता है।
इस “सीमा विवाद” और जवाबदेही की कमी के कारण बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा चुके हैं। कुछ पेड़ पुराने कटे हुए हैं तो कुछ दो-चार दिन पहले ही काटे गए हैं, जिससे स्पष्ट है कि कटान निरंतर जारी है।
प्लांटेशन का अस्तित्व खतरे में सूत्रों के अनुसार, कुछ वर्ष पूर्व साढौरा रेंज द्वारा यहाँ शीशम के पौधों का रोपण किया गया था। शुरुआत में हरियाली की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब हालात यह हैं कि पटरी के दोनों ओर गिनती के पेड़ ही शेष बचे हैं। पेड़ों को जिस तरह बीच से या जड़ के पास से काटा गया है, वह दर्शाता है कि यहाँ लकड़ी और पत्ता कटान धड़ल्ले से चल रहा है।
जवाबदेही तय होना जरूरी हाल ही में हुई हाई-लेवल मीटिंग्स में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े स्तर पर पौधारोपण के निर्णय लिए गए हैं। लेकिन खानूवाला का यह मामला एक कड़वा सवाल खड़ा करता है: जब तक मौजूदा पेड़ों की सुरक्षा और उनकी देखभाल की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक करोड़ों रुपये खर्च कर किए जाने वाले पौधारोपण का क्या लाभ?
स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों ने आला अधिकारियों से मांग की है कि इस अवैध कटान की जांच की जाए और संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों या पंचायत की जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की क्षति को रोका जा सके।



