बाढ़ की आशंका के बीच पंचायत ने अपने अधिकारियों को पत्र लिखकर सहारनपुर प्रशासन को भी कार्रवाई के लिए अनुरोध करने की मांग की

यमुनानगर (ताजेवाला): यमुनानगर के ताजेवाला क्षेत्र में यमुना नदी से बड़े पैमाने पर बोल्डर यानी मोटे पत्थर की चोरी का एक बड़ा खेल चल रहा है। इसके साथ ही निजी जमीनों पर भी लगातार अवैध खनन होने से स्थानीय हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि स्थानीय ग्राम पंचायत पिछले कई सालों से लगातार इस संबंध में प्रस्ताव डालकर बीडीपीओ (BDPO) के माध्यम से प्रशासन को लिखित शिकायतें दे रही है। मगर धरातल पर कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन द्वारा इसे पंचायत की ही जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ा जा रहा है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि पंचायत के पास प्रशासन को सिर्फ सूचना देने के अलावा कानूनन कोई अन्य पावर नहीं है। इस समय न तो खनन विभाग, न ही एनफोर्समेंट विंग और न ही कोई अन्य संबंधित विभाग इस अवैध धंधे पर कार्रवाई करता हुआ दिखाई दे रहा है।

रोजाना लाखों के राजस्व पर डाका और विभागों की मूकदर्शिता

इस प्रशासनिक ढिलाई की वजह से केवल यमुना नदी से ही हर रोज 10 से 15 लाख रुपये का पत्थर खुलेआम चोरी हो रहा है। जानकारों का मानना है कि अगर इस चोरी के माल में रॉयल्टी, पेनल्टी और जीएसटी (GST) की राशि को भी जोड़ दिया जाए, तो यह नुकसान ओर अधिक बढ़ सकता है। इसके साथ ही अगर निजी जमीनों पर हो रहे अवैध खनन को जोड़ दिया जाए तो यह अनुमान कई गुणा अधिक हो जाता है।

यमुना नदी से हो रहे इस अवैध दोहन को रोकने की सीधी जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की भी बनती है, मगर वह भी इस पूरे मामले में मूकदर्शक बना हुआ है। इस बार हालात को देखते हुए पंचायत ने अपने एक प्रस्ताव में जिला प्रशासन से यह विशेष अनुरोध किया है कि इस मामले को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिला प्रशासन को भी पत्र लिखकर संयुक्त कार्रवाई करने की मांग की जाए।

स्थानीय रसूखदारों का दशकों पुराना नेटवर्क, सिंचाई विभाग की साइटों पर ही खप रहा चोरी का माल

ताजेवाला आज बिना किसी सरकारी नीलामी के एक बहुत बड़ा अवैध खनन घाट बन चुका है। यहां पर अवैध खनन के कारण हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। यमुना नदी की पटरी (बांध) के साथ-साथ और पटरी के दूसरी ओर, यानी आबादी वाले क्षेत्र की तरफ भी जमकर अवैध खनन को अंजाम दिया जा रहा है। इस पूरे अवैध धंधे के पीछे कोई बाहरी लोग नहीं, बल्कि स्थानीय लोग ही शामिल हैं, जो पिछले कई दशकों से इस अवैध खनन के कारोबार को बेखौफ चला रहे हैं।

हर साल यहां से करोड़ों रुपये की कीमत का पत्थर चोरी हो रहा है। इस खेल का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस चोरी किए गए पत्थर का एक बहुत बड़ा हिस्सा खुद सिंचाई विभाग की ही बाढ़ से बचाव कार्यों वाली सरकारी साइटों पर धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। यह अवैध पत्थर खुलेआम ‘पंचायत व हाइडिल के रास्ते’ और ‘बांबेपुर से प्रतापनगर के रास्ते’ से होकर ट्रकों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर निकलता है, मगर आश्चर्य की बात है कि किसी भी सरकारी विभाग की नजर इस पर नहीं पड़ती।

बाढ़ के खतरे की आशंका: पंचायत लगातार लिख रही पत्र, मगर संबधित विभागों की नहीं टूट रही नींद

ताजेवाला पूरा गांव यमुना नदी के ठीक किनारे पर बसा हुआ है। यहां पर पटरी के अंदरूनी हिस्सों में और गांव की खेती योग्य उपजाऊ जमीनों पर लगातार अवैध खुदाई चल रही है। चूंकि ताजेवाला में कुछ रकबा उत्तर प्रदेश (UP) की सीमा से भी लगता है—यानी यूपी की साइड की भी कुछ जमीन हरियाणा के क्षेत्र में आती है—उस जमीन को भी माफियाओं द्वारा लगातार खोदा जा रहा है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि इन्हें रोकने टोकने वाला कोई नहीं है।

पिछले कई सालों से केवल स्थानीय पंचायत ही एकमात्र ऐसी संस्था है जो बीडीपीओ के माध्यम से लगातार खनन विभाग, एनफोर्समेंट विंग और अन्य संबंधित विभागों को पत्र भेजकर आने वाले खतरे से आगाह कर रही है। मगर जिन जिम्मेदार विभागों को मौके पर आकर कार्रवाई करनी चाहिए, वहां से कोई भी अधिकारी या कर्मचारी नहीं आता।

खंड कार्यालय प्रतापनगर द्वारा हालिया पत्रों की कतरनें प्रशासनिक उदासीनता की गवाही देती हैं:

  • पत्र क्रमांक 3608 (दिनांक 8 जून 2026): इस पत्र के माध्यम से डीसी को ताजेवाला की किसी भी जमीन की नीलामी न करवाए जाने के बारे में लिखा गया है। यानी पंचायत ने यहां पर किसी भी तरह का नया खनन पट्टा (लीज़) दिए जाने की आशंका पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है।

  • पत्र क्रमांक 3614 (दिनांक 9 जून 2026): इस पत्र में ताजेवाला के कुछ खास स्थानीय लोगों द्वारा हरियाणा-उत्तर प्रदेश की सीमा पर किए जा रहे अवैध खनन के बारे में पुख्ता जानकारी देकर तुरंत कार्रवाई की मांग की गई है। इस पत्र में भी स्पष्ट रूप से चेताया गया है कि यदि यह खनन नहीं रुका तो आगामी दिनों में क्षेत्र में भयानक बाढ़ आ सकती है। इसी पत्र के माध्यम से पंचायत ने जिला प्रशासन से यूपी के सहारनपुर जिला प्रशासन को भी इस सीमावर्ती अवैध खनन पर नकेल कसने के लिए लिखने का अनुरोध किया है।

  • पत्र क्रमांक 3691 (दिनांक 12 जून 2026): इस पत्र के जरिए ‘रांगड़ान बांस से नैनावाली’ जाने वाले रास्ते को पूरी तरह से बंद करने की सिफारिश की गई है। पत्र में तर्क दिया गया है कि चूंकि इस रास्ते पर एचपीजीसीएल (HPGCL) की सरकारी भूमि लगता है, इसलिए इस रास्ते को तुरंत बंद करवाया जाए ताकि खनन माफिया इसका उपयोग न कर सकें। इसके अलावा भी पंचायत द्वारा दर्जनों पत्र लिखकर लगातार अवैध खनन पर अपनी चिंता जताई जा चुकी है।

करोड़ों की चोरी पर विभागों का ‘यूपी साइड’ वाला बहाना

अगर हर रोज यमुना नदी से 10 से 15 लाख रुपये के पत्थर की सीधी चोरी हो रही है, तो सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर खनन विभाग, एनफोर्समेंट विंग और सिंचाई विभाग का भारी-भरकम स्टाफ इस वक्त कहां सोया हुआ है? आमतौर पर जब भी इन विभागों से सवाल पूछा जाता है, तो अधिकारियों द्वारा यह घिसा-पिटा बहाना बना दिया जाता है कि यमुना नदी में पत्थर की यह चोरी उत्तर प्रदेश (UP) की साइड से हो रही है।

लेकिन इस बहाने की पोल तब खुल जाती है जब यह देखा जाता है कि पत्थरों के परिवहन (Transportation) के लिए सबसे पहले सिंचाई विभाग की ही सरकारी पटरी का इस्तेमाल होता है। उसके बाद यह चोरी का माल पंचायत, हाइडिल और अन्य स्थानीय मार्गों से होकर गुजरता है और सबसे बड़ी बात यह है कि यह चोरी का सारा माल हरियाणा के भीतर ही अलग-अलग जगहों पर इस्तेमाल हो रहा है।

ऐसे में संबंधित विभागों की इसे रोकने की पूरी और सीधी कानूनी जिम्मेदारी बनती है, मगर सवाल यह है कि आखिर किस  की शह पर इन माफियाओं को इतनी खुली छूट दी गई है? ताजेवाला एरिया में पहले भी कई बार अवैध पत्थर के बड़े-बड़े स्टॉक पकड़े जा चुके हैं, इसके बावजूद अंत में कार्रवाई हमेशा शून्य ही साबित होती है।

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