प्रतापनगर। प्रतापनगर क्षेत्र के अंतगर्त आने वाले आधा दर्जन से अधिक गांवों में जमकर अवैध ख्रनन चल रहा है। निजी खेतों, यमुना नदी व अन्य सरकारी जमीनों से सैकड़ों की संख्या में निकाला कच्चा माल आस-पास के स्क्रीनिंग प्लाटों के साथ-साथ स्टोन क्रशर्स पर जा रहा है। कलेसर से लेकर ताजेवाला व उसके नीचे मांडेवाला, डेकडीवाला , कोलीवाला एरिया के बाद बेलगढ़ व कन्यावाला या भीलपुरा तक यह अवैध खनन चल रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि बिना ई-रवाना व बिल के माल तैयार कर बेचा नहीं जा सकता तो आखिर यह अवैध खनन से तैयार माल को कहां पर खपा रहे हैं वह भी तब की हालत में जब हर सड़क पर प्रशासन ने चेकिंग पोस्ट लगाई हुई है।
प्रतापनगर क्षेत्र में अवैध खनन से हालत बद से बदतर होती जा रही है। शुरुआत होती है कलेसर में यमुना नदी से अवैध खनन कर ट्रैक्टर-ट्रालियों से लगातार माल फैजपुर एरिया में स्टाक किया जाता है उसके बाद रात के समय उसे डंपरो व ट्रालियों आदि के माध्यम से हथिनीकुंड के कच्चे रास्ते से ताजेवाला व ताजेवाला से अराईयांवाला होते बांबेपुर या अन्य लिंक रोड से निकाला जाता है।
दूसरी लोकशन डेकड़ीवाला में सरकारी स्कूल के समीप, गांव से भूडकला जाने वाली सड़क के साथ, नैनावाली शमशानघाट के समीप उसी रास्ते पर आगे ताजेवाला निजी जमीनों में ताजेवाला पहुंचने के बाद यमुना नदी से लगातार अवैध खनन चल रहा है। जिन साइटों पर लगातार अवैध खनन चल रहा है वहां पर लगातार जीपीएस के साथ वीडियो व फोटो आ रही है। इसके बावजूद न तो उन साइटों की पैमाइश हो रही है न ही वहां पर कोई कार्रवाई की जा रही है। भूड़कलां के समीप खुलेआम हर रास्ते पर कच्चे माल से लदे डंपर व ट्रैक्टर-ट्रालियां दौड़ते देखे जा सकते है।
इसके यमुना में थोडा ओर नीचे चलते है तो बेलगढ़ – भीलपुरा एरिया में यमुना नदी व उसके आस-पास भी यही हालत है। इन एरिया में लगभग 12 से 18 घंटे अवैध खनन होता है। सारा माल स्क्रीनिंग प्लांटों व क्रशिंग यूनिटस पर जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल बिना रायल्टी एजेंसी से खरीद के बिक्री कैसे संभव
अवैध खनिज से सरकार को हर माह करोड़ों का चूना तो लग रहा है,मगर सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जब कोई भी क्रशिंग या स्क्रीनिंग यूनिट बिना वैध परचेज बिल के माल को आगे बेच नहीं सकती तो अवैध खनन से तैयार माल आगे कैसे जा रहा है यानी अगर कोई रायल्टी फर्म कच्चा माल व बिल किसी यूनिट को देगी तभी तो वह आगे उसको तैयार कर बेचेगा, ऐसे में आखिर चल क्या रहा है। जांच एजेंसिया जब कहीं पर कोई बड़ा स्कैंडल हो जाता है तब सांप निकलने के बाद लकीर पिटती दिखती है। यहां पर तो खुलेआम यह गोलमाल चल रहा है।
क्या एजेंसिया केवल बिल दे रही है माल अवैध खनन से ही आ रहा है
एक ओर बड़ा सवाल है कि क्या इस एरिया में रायल्टी फर्में केवल अपनी सेल के बिल दे रही है ओर माल आस-पास के एरिया से हो रहे अवैध खनन से आ रहा है तो यह सबसे बड़ा मामला बनता है, यानी जांच केवल खनन किए हुए गडडो से होकर पोर्टल तक पहुंचेगी तो शायद बहुत कुछ निकलेगा, आखिर क्रशिंग व स्क्रीनिंग यूनिटस के सीसीटीवी कैमरो की चेकिंग क्यों नहीं की जाती, क्योंकि जब कच्चा माल किसी यूनिट पर आता होगा तो वह किसी गाड़ी से आता होगा। वह गाड़ी कब खनिज क्षेत्र से चली कब किसी यूनिट पर पहुंची यह तो सब आसानी से पता चल जाएगा।
एनफोर्समेंट ब्यूरो कर रही है कार्रवाई, तो खनन विभाग का पता नही
इस एरिया में एनफोर्समेंट ब्यूरो तो इक्का-दुक्का कार्रवाई करती रहती है मगर खनन विभाग के जिन कर्मचारियों की यहां पर डयूटी है वह क्या कर रहे है किसी को पता नहीं। इन कर्मचारियों की जवाबदेही क्यों नहीं तय की जाती है। हर एरिया में खनन विभाग के एक से दो गार्ड तैनात रहते है, यानी यह जो खुलेआम अवैध खनन चल रहा है इनकी जानकारी में चल रहा है। वहीं खनन विभाग के अधिकारी तो किसी का फोन ही नहीं उठाते न फोन उठाओ न किसी को जवाब देना पड़ेगा।
इस मामले में एनफोर्समेंट ब्यूरो के जिला इंचार्ज राजेश कुमार का कहना है कि जहां भी सूचना मिलती वहां पर तुरंत रेड होती है कई बार सूचना मिलने पर अवैध खनन करने वाले फरार हो जाते है मगर फिर भी विभाग लगातार अवैध खनन में लगे वाहनों को सीज कर रहा है। वहीं जब उनसे पूछा गया कि आखिर गडढो की पैमाइश क्यों नहीं होती तो उनका कहना था कि यह खनन विभाग का काम है।




