ढाकवाला, यमुनानगर। वाइल्ड लाइफ विभाग द्वारा लगभग एक माह पूर्व इलाके में वन संपदा की सुरक्षा और तस्करी पर लगाम लगाने के लिए बनाई गई ‘ढाक वाला नई चेक पोस्ट’ खुद प्रशासनिक उपेक्षा के घने अंधकार में डूबी हुई है। अति संवेदनशील क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद इस चेक पोस्ट पर केवल एक बेरियर लगा दिया गया है, जहां पर न बैठने के लिए टेंट है न कुर्सी न बिजली न पानी, ग्रामीण क्षेत्र की अंधेरी लिंक रोड पर यह चेक पोस्ट पर कर्मचारियों की डयूटी उनकी जान जोखिम में डालने जैसी है। अधिकारी केवल बड़ी-बड़ी बातें ओर खैर तस्करी रोकने के दावे तो कर रहे है मगर इस तरह की चेकपोस्ट के सहारे इन दावों को अमलीजामा पहनाना नामुमकिन है। 

🔴 तस्करों का मुख्य गढ़, फिर भी सुरक्षा शून्य

विश्वस्त सूत्रों और स्थानीय इनपुट्स के अनुसार, ढाक वाला चेक पोस्ट के बेहद नजदीक ‘जाटोवाला’ और ‘डारपुर’ गांव पड़ते हैं। यह पूरा इलाका प्रतिबंधित ‘खैर’ (Khair) की लकड़ी की तस्करी के लिए कुख्यात माना जाता है। छोटे-बड़े तस्कर जाटोवाला गांव को मुख्य ट्रांजिट हब की तरह इस्तेमाल करते हैं, जहाँ खैर की लकड़ियों को लाकर इकट्ठा किया जाता है और फिर बड़ी गाड़ियों में लोड कर आगे सप्लाई किया जाता है। इतने संवेदनशील पॉइंट पर स्थापित इस नई चेक पोस्ट पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए थे, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।

❌ न बिजली, न बैरिकेड; घनघोर अंधेरे के भरोसे सुरक्षा

हैरानी की बात यह है कि इस महत्वपूर्ण नाके पर बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है। रात होते ही यहाँ घनघोर अंधेरा छा जाता है। सड़क की चौड़ाई कम होने और भारी यातायात (मोटरसाइकिल, कार और भारी वाहनों) के बावजूद यहाँ गाड़ियों को रोकने के लिए कोई सुविधा नहीं है। रफ्तार से गुजरते वाहनों और अंधेरे के बीच संदिग्ध गाड़ियों की जांच करना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है।

“भीषण गर्मी में कर्मचारियों के बैठने के लिए न तो कोई कुर्सी है, न टेंट और न ही कोई पक्का कमरा। कर्मचारी खुले आसमान के नीचे जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करने को मजबूर हैं।”

⚠️ रसूखदारों के आगे बेबस महकमा! पूर्व में कर्मचारियों से हो चुकी है मारपीट

बताया जाता है कि इस अव्यवस्था के कारण कुछ समय पहले यहाँ तैनात दो कच्चे (अनुबंध) कर्मचारियों के साथ तस्करों और असामाजिक तत्वों द्वारा बेरहमी से मारपीट की गई थी। लेकिन घालमेल और रसूखदारों के दबाव के आगे महकमे  द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई बल्कि ठीकरा उन कर्मचारियों के सिर फोड़ दिया गया।  इस तरह की दंडात्मक और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई से ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मियों का मनोबल पूरी तरह टूट रहा है।

📢 उच्च अधिकारियों से त्वरित हस्तक्षेप की मांग

स्थानीय स्तर पर और सजग कर्मियों द्वारा अब उच्च अधिकारियों से गुहार लगाई जा रही है कि किसी बड़े हादसे या दोबारा होने वाले जानलेवा हमले का इंतजार करने के बजाय तुरंत निम्नलिखित कदम उठाए जाएं:

  1. हाई-मास्ट लाइट: रात के अंधेरे को चीरने के लिए तुरंत बिजली और लाइटों की व्यवस्था हो।

  2. सुरक्षा शेल्टर: गर्मी से निजात पाने और सुरक्षित बैठने के लिए टेंट या कमरा अलॉट किया जाए।

  3. यहां पर कोई बेरीकेड तक नही है ऐसे में वाहनों को रोकन नामुमकिन है।

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