यमुनानगर। टाऊन कंट्री प्लानिंग विभाग ने जगाधरी तहसील के भटौली क्षेत्र में करीब 2 एकड़ में विकसित की जा रही दो अवैध कॉलोनियों पर तोड़फोड़ (डेमोलिशन) की कार्रवाई की है। प्रशासन ने कच्ची सड़कों और सीवरेज लाइन को ध्वस्त तो कर दिया और आम जनता को अवैध प्लॉट न खरीदने की हिदायत भी दे दी, लेकिन विभाग की इस पूरी प्रेस विज्ञप्ति में प्रभावित जमीन के खसरा नंबरों (Khasra Numbers) का कोई जिक्र नहीं है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर विभाग खसरा नंबरों की स्पष्ट जानकारी क्यों छुपाता है? अगर खसरा नंबर उजागर किए जाएं, तो प्लॉट खरीदारों को आसानी से पता चल सकेगा कि कौन सी जमीन अवैध है और वे ठगी का शिकार होने से बच सकेंगे।
नोटिस के बाद भी जारी था अवैध निर्माण
जिला नगर योजनाकार राजेश कुमार ने बताया कि राजस्व संपदा भटौली में बिना विभागीय अनुमति के कॉलोनियां बसाई जा रही थीं। कॉलोनाइजरों को ‘हरियाणा डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन ऑफ अर्बन एरियाज एक्ट-8 (1975)’ के तहत नोटिस भी जारी किए गए थे।
कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए शिक्षा विभाग के डीईईओ (DEEO) अशोक कुमार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था। मौके पर DTP राजेश कुमार, राज्य प्रवर्तन ब्यूरो (यमुनानगर) के थाना प्रबंधक और भारी पुलिस बल मौजूद रहा।
खसरा नंबरों की जानकारी न देना पारदर्शिता पर खड़ा करता है सवाल
प्रशासन हर कार्रवाई के बाद जनता से अपील करता है कि वे अवैध कॉलोनियों में प्लॉट न खरीदें, लेकिन इसके लिए जरूरी जानकारी जनता तक आधी-अधूरी ही पहुंचती है। यदि विभाग तोड़फोड़ की कार्रवाई के साथ ही उन जमीनों के खसरा या किला नंबर सार्वजनिक कर दे, तो आम नागरिक कॉलोनाइजरों और भू-माफियाओं के झांसे में आने से बच सकते हैं। सार्वजनिक सूचनाओं में खसरा नंबरों की कमी विभाग की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।
प्रशासन की चेतावनी: खरीद-फरोख्त करने वाले खुद होंगे जिम्मेदार
उपायुक्त प्रीति और DTP राजेश कुमार ने आम जनता से पुनः अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत कॉलोनी में प्लॉट आदि की खरीद-फरोख्त न करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ऐसी अवैध कॉलोनियों और निर्माणों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी वित्तीय या भौतिक नुकसान के लिए व्यक्ति स्वयं जिम्मेदार होगा।



