छछरौली (यमुनानगर):
छछरौली ग्राम पंचायत की कमर्शियल दुकानों में बिना किराया दिए जम कर बैठे दुकानदारों का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। पंचायत की विभिन्न दुकानों पर वर्षों से लाखों रुपये का किराया बकाया जमा हो चुका है, जिसे वसूलने में स्थानीय प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधि पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीण ने उप मंडल अधिकारी (नागरिक) को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे घालमेल की उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग उठाई है।
पुराने से लेकर नए किरायेदार तक बकाया दबाकर बैठे
शिकायत में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, पंचायती दुकानों के किरायेदारों ने लंबे समय से किराए का भुगतान नहीं किया है:
पुराने दुकानदारों की बकायेदारी:
एक दुकान का अकेले ही ₹1,56,600 का भारी-भरकम किराया पिछले कई सालों से फंसा हुआ है।
दो अन्य दुकानों का पिछले 2 वर्षों का ₹92,000 – ₹12,000 का किराया लंबित है।
इसके अलावा एक और दुकान पर ₹20,000 का बकाया चढ़ा हुआ है।
नए किरायेदारों ने भी पकड़ा वही ढर्रा:
हैरानी की बात यह है कि हाल ही में दी गई दुकानों के नए बकायेदार भी पुराने दुकानदारों के पदचिह्नों पर चलते हुए किराए का भुगतान करने से बच रहे हैं। जुलाई से सितंबर के महज 3 महीनों के भीतर ही:
एक नई दुकान पर ₹39,300,
दूसरी दुकान पर ₹34,500,
और तीसरी दुकान पर ₹25,800 का किराया बकाया हो चुका है।
ब्याज सहित वसूली और कार्रवाई की मांग
प्रशासन को दिए पत्र में मांग की गई है कि:
सभी बकायदार दुकानदारों से बकाया राशि ब्याज सहित वसूल की जाए।
किराया वसूलने में लापरवाही बरतने वाले संबधित लोगों पर विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में पंचायती संपत्ति का दुरुपयोग रोका जा सके।
सवाल यह है कि जिन दुकानदारों ने पिछले दो से साढ़े तीन वर्ष के दौरान किराया रोका हुआ है उनको इतना समय क्यों दिया गया, जिससे लगातार किराया बढ़ता ही गया।
इस बारे में छछरौली के बीडीपीओ कार्तिक चौहान का कहना है कि इस मामले में तीन माह पहले इन दुकानदारों को बेदखल करने के लिए केस डाला गया है।



