कलेसर (यमुनानगर):
भूड़कलां पुल के सामने जुलाहोमाजरा से जयधरी जाने वाली पटरी के साथ लगते खैर के जंगल में इन दिनों नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से घास-पूले का अवैध कटान किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर मामले में कोई भी विभाग जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। इस जंगल की देखरेख और प्लांटेशन (पौधारोपण) का काम वन विभाग द्वारा किया जाता है, जबकि यह एरिया एचपीजीसीएल का बताया जाता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र में पहली प्लांटेशन के बाद लगभग 3-4 साल पहले भी वन विभाग द्वारा ही प्लांटेशन करवाई गई थी। प्लांटेशन से लेकर मेंटेनेंस तक का बजट वन विभाग द्वारा बुक किया जाता है, लेकिन जब रखवाली या कार्रवाई की बात आती है, तो वन कर्मचारियों का तर्क होता है कि इस क्षेत्र में उनका केवल ‘सेक्शन चार’ का एरिया पड़ता है।
पिछले मामलों के बावजूद रोक बेअसर
पिछली बार घास-पूले के कटान के दौरान पेड़ों के अवैध कटान और अन्य कई गंभीर मामले सामने आए थे। इसके बाद वन मुख्यालय ने इस बार यमुनानगर डिवीजन घास-पूले के कटान पर पूरी तरह रोक लगा रखी है।
किसकी जेब में जा रहा है राजस्व?
नियमों के मुताबिक यदि इस घास-पूले का विधिवत टेंडर किया जाए, तो इससे सरकारी खजाने में लाखों रुपये की आमदन हो सकती है। लेकिन बिना किसी टेंडर के जंगल से घास-पूला कटने से यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर यह राजस्व किसकी जेब में जा रहा है? बिना किसी विभागीय मिलीभगत के इस तरह का अवैध काम होना संभव नहीं है।
अधिकारियों के बयान:
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वन विभाग के दरोगा का कहना है कि इस एरिया में वह केवल ‘सेक्शन चार’ के तहत ही कार्रवाई कर सकते हैं।
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एचपीजीसीएल के जेई का कहना है कि उन्होंने किसी को भी घास-पूले के कटान का टेंडर नहीं दिया है। वहां कौन घास-पूला काट रहा है, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है और वे जल्द ही इसका पता करवाएंगे।



