प्रतापनगर/लाकड़मयप्रतापपुर:
प्रतापनगर के लाकड़मयप्रतापपुर और आसपास के इलाकों में यमुना नदी से अवैध खनन का काला कारोबार बेखौफ जारी है।  खनन माफियाओं द्वारा खेतों के रास्तों का इस्तेमाल कर उत्तर प्रदेश सीमा से सटे यमुना क्षेत्र से रातभर अवैध खनन किया जा रहा है।जिससे लोगों की नींद भी हराम हो गई है। वहीं एनफोर्समेंट ब्यूरो के इंचार्ज का कहना है कि उन्हें शिकायत मिल गई है उन्होंने एक गाड़ी को रात को पकड़ा भी है। अब आगे ओर सख्ती कर दी जाएगी।

रात 9 बजे से सुबह 10 बजे तक चलता है यमुना सीना चीरने का खेल

ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले करीब एक हफ्ते से यह अवैध खेल खुलकर और बड़े पैमाने पर चल रहा है। रात को करीब 9 से 10 बजे के बीच जेसीबी और एचएम (Heavy Machines) जैसी भारी मशीनें यमुना नदी की ओर कूच कर जाती हैं।
यह अवैध खनन उत्तर प्रदेश के क्षेत्र ‘धौलरा’ के पास यमुना नदी में किया जा रहा है। रातभर चलने वाली इस खुदाई के बाद सैकड़ों की संख्या में वाहन इस अवैध खनिज को लेकर लाकड़ और नत्थनपुर क्षेत्र में स्थापित क्रशिंग व स्क्रीनिंग प्लांटों तक पहुंचा रहे हैं। सुबह 10 बजे तक यह सिलसिला लगातार जारी रहता है, जिससे हर रोज सरकारी खजाने को लाखों रुपये का चूना लग रहा है।

बिना रॉयल्टी और ई-रवाना के हो रही चांदी

नियमों के मुताबिक, एक राज्य से दूसरे राज्य में खनिज लाने के लिए न केवल उसकी विधिवत कीमत और रॉयल्टी चुकानी पड़ती है, बल्कि आईएसटीपी (ISTP) जैसे वैध दस्तावेज भी अनिवार्य होते हैं। लेकिन इस पूरे मामले में बिना किसी घाट की अनुमति, बिना रॉयल्टी और बिना किसी ई-रवाना के मुफ्त का रॉ मैटेरियल धड़ल्ले से क्रशर्स तक पहुंचाया जा रहा है और फिर इसे ऊंचे दामों पर बाजार में बेचा जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर यह सब किसकी शह पर चल रहा है?

लाकड़ तिराहे पर नाका न होने से माफियाओं को मिला ‘सेफ रूट’

पिछले कई सालों से लगातार अवैध खनन की शिकायतें मिलने के बावजूद लाकड़ तिराहे पर पुलिस या प्रशासन की ओर से कोई स्थायी नाका या चेकपोस्ट नहीं लगाया गया है। यही वजह है कि खनन माफियाओं और ओवरलोड वाहनों के लिए यह रास्ता एक सुरक्षित गलियारा (सेफ रूट) बन गया है, जहां से वे बिना किसी डर के बेधड़क निकल रहे हैं।

ग्रामीणों का जीना हुआ मुहाल, उड़ती धूल से बढ़ी परेशानी

अवैध खनन और रातभर दौड़ने वाले भारी वाहनों के कारण स्थानीय ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ चुकी है। ग्रामीणों ने बताया कि रातभर ट्रकों और डंपरों के शोर के कारण सोना दूभर हो गया है। वहीं, सुबह के समय खेतों की ओर जाना भी मुश्किल हो गया है क्योंकि भारी वाहनों के चलने से उड़ने वाली मिट्टी और धूल ने पूरे इलाके के पर्यावरण और जनजीवन को बेहाल कर दिया है।

एनफोर्समेंट ब्यूरो चूड़ी टाइट करने की तैयारी में 

इस पूरे मामले में जब एनफोर्समेंट ब्यूरो के प्रभारी राजेश कुमार से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने हाल ही में रात के वक्त एक गाड़ी को पकड़ा है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि अब इलाके में रूटीन चेकिंग बढ़ा दी जाएगी ताकि इस तरह के अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
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