जगाधरी, यमुनानगर। जिले में माइनिंग कारोबार से जुड़े कथित बोगस खरीद रिकॉर्ड को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई से खनन कारोबार में हलचल तेज हो गई है। 50 करोड़ रुपये से अधिक के कथित लेनदेन गडबड़ी के आरोपों के बीच रायल्टी फर्म के ठिकानों पर जांच की गई।

जांच का केंद्र माइनिंग खरीद से जुड़े रिकॉर्ड बताए जा रहे हैं। टीमों द्वारा कागजी दस्तावेजों के साथ-साथ कंप्यूटर, डिजिटल डाटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि रिकॉर्ड में दर्ज खरीद वास्तव में हुई थी या केवल कागजों में दिखाई गई।

कागजों की खरीद या जमीन पर माल?

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन खनिजों की खरीद-बिक्री दस्तावेजों में दर्ज दिखाई गई, उनका वास्तविक स्रोत क्या था और उनके बदले हुए वित्तीय लेनदेन का पूरा हिसाब क्या है। जांच में बिल, खरीद रिकॉर्ड, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल एंट्री महत्वपूर्ण कड़ियां मानी जा रही हैं।

जांच आगे बढ़ी तो खुल सकते हैं कई राज

छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड अब जांच का आधार बन सकते हैं। रिकॉर्ड के मिलान से यह सामने आने की उम्मीद है कि कथित बोगस खरीद में कौन-कौन से कारोबारी, फर्म या अन्य पक्ष जुड़े हुए थे और कितनी रकम का वास्तविक लेनदेन हुआ।जांच पूरी होने के बाद ही कथित अनियमितताओं की वास्तविक राशि और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

माइनिंग से जुड़े मामलों में यमुनानगर पहले भी कार्रवाई के केंद्र में रहा है। जिले में अवैध खनन और खनिज परिवहन पर प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई होती रही है। अब नजर इस बात पर है कि छापेमारी में मिले डिजिटल और कागजी रिकॉर्ड से माइनिंग खरीद का कौन-सा पूरा नेटवर्क सामने आता है।

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