हरियाणा-यूपी सीमा पर निजी भूमि के अलावा यमुना नदी में धड़ल्ले से चल रहा अवैध खनन
ग्राम पंचायत ने जताया था बाढ़ और जान-माल के भारी नुकसान का खतरा, पर दो हफ्ते तक फाइलों में दबा रहा मामला
यमुनानगर: हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित ग्राम पंचायत ताजेवाला में चल रहे अवैध खनन को लेकर खनन विभाग की एक बड़ी लापरवाही और सुस्ती उजागर हुई है। ग्राम पंचायत द्वारा तबाही का अंदेशा जताए जाने और खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (BDPO) द्वारा सख्त कार्रवाई के लिए लिखे गए पत्र के पूरे 14 दिन बाद आखिरकार खनन विभाग की नींद टूटी है। सहायक खनन अभियंता (यमुनानगर) ने 23 जून 2026 को हरियाणा राज्य प्रवर्तन ब्यूरो के थाना प्रबंधक को पत्र लिखकर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की है। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि संवेदनशीलता के इस मामले पर खनन विभाग दो सप्ताह तक क्यों चुप रहा? सोमवार को यमुनापोस्ट ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था।
बाढ़ का खतरा: ग्राम पंचायत ताजेवाला ने 4 जून 2026 को ही प्रस्ताव संख्या 02 पारित कर प्रतापनगर खंड कार्यालय को सूचित कर दिया था कि क्षेत्र में बड़े स्तर पर अवैध खनन का खेल चल रहा है। इस प्रस्ताव के आधार पर बीडीपीओ प्रतापनगर ने 9 जून 2026 को ही उपायुक्त (DC) यमुनानगर को पत्र (क्रमांक 3614) भेजकर कानूनी कार्रवाई की मांग की थी, जिसकी प्रति खनन अधिकारी को भी भेजी गई थी। इसके बावजूद खनन विभाग ने इस पर कार्रवाई करने में पूरे 14 दिन (23 जून तक) लगा दिए।
सरकारी पत्रों में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि जिस स्थान पर अवैध खनन किया जा रहा है, वह हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित निजी भूमि है। लगातार हो रहे इस अवैध खनन के कारण आगामी मानसून सत्र में ताजेवाला में बाढ़ का पानी घुसने की प्रबल संभावना बन गई है, जिससे आमजन के जान-माल के भारी नुकसान का खतरा भी पैदा हो गया है। यहां भी बता दें कि यह शिकायत निजी जमीनों पर किए जा रहे अवैध खनन से संबधित है, यमुना नदी में अवैध खनन को लेकर विभाग ने क्या कार्रवाई की है इसकी कोई जानकारी नहीं है।
जब बीडीपीओ ने 9 जून को ही खनन अधिकारी को पत्र की प्रति भेजकर आगामी आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दिया था, तो विभाग को जागने में 14 दिन क्यों लगे?
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क्या खनन विभाग मानसून से ठीक पहले बाढ़ के इस गंभीर खतरे को भांपने में नाकाम रहा। विभाग का खुद का स्टाफ जिसमें माइनिंग गार्डस की निरंतर इस एरिया में डयूटी है विभाग के गार्डस ने आखिर कितनी बार अपने अधिकारियों को अवैध खनन की सूचना दी।
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केवल एनफोर्समेंट ब्यूरो को पत्र लिखकर खनन विभाग अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता है, क्योंकि अवैध खनन को रोकने के लिए उसका स्टाफ लगातार डयूटी देता है। ऐसे में क्या उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। जिन निजी जमीनों में अवैध खनन हुआ है क्या उनकी पैमाइश खनन विभाग के स्टाफ ने की है। पैमाइश का काम खनन विभाग का स्टाफ ही करता है।




