पंचकूला। हरियाणा के वन विभाग में अवैध पेड़ कटान को लेकर आंतरिक कलह गहरा गई है। पंचकूला से निलंबित मण्डलीय वन्य जीव अधिकारी (DWLO) ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक को एक आधिकारिक शिकायती पत्र भेजकर विभाग के ही कुछ तत्कालीन शीर्ष अधिकारियों और क्षेत्रीय विंग पर गंभीर आरोप लगाए हैं । अधिकारी का दावा है कि क्षेत्रीय वन मण्डल में हुए अवैध कटान को छुपाने के लिए उन्हें जानबूझकर ‘बलि का बकरा’ बनाया गया और गलत तरीके  से निलंबित कर सरकार को गुमराह किया गया है ।

यह शिकायती पत्र आगामी आवश्यक कार्यवाही के लिए मुख्यमंत्री, पर्यावरण एवं वन मंत्री तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) को भी भेज दिया गया है ।

मुख्य विवाद: एरिया बदलने से पहले ही कट चुके थे बड़ी संख्या में पेड़

शिकायतकर्ता के अनुसार, यह पूरा मामला पंचकूला वन मण्डल के अधीन आसरेवाली वन क्षेत्र में हुए खैर के पेड़ों के अवैध कटान से जुड़ा है ।

  • क्षेत्र का स्थानांतरण: सितंबर 2025 में इस प्रोटेक्टिड एरिया को क्षेत्रीय विंग (Territorial Wing) से वन्य जीव विभाग (Wildlife Department) को ट्रांसफर किया गया था ।

  • अवैध कटान की टाइमलाइन: अधिकारी का आरोप है कि बड़ी संख्या में पेड़ों की यह कटाई वन्य जीव विभाग को एरिया ट्रांसफर होने से बहुत पहले, यानी वर्ष 2023, 2024 और 2025 के दौरान ही क्षेत्रीय वन मण्डल के कार्यकाल में हो चुकी थी, जिसे अब वन्य जीव विभाग के सिर मढ़ा जा रहा है ।

1148 पेड़ों की कटाई और जांच रिपोर्ट पर सवाल

शिकायत पत्र में सरकारी स्तर पर कराई गई जांचों पर कई गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं:

  1. शुरुआती रिपोर्ट: अप्रैल 2024 में क्षेत्रीय विंग द्वारा गठित एक टीम ने मई 2024 में अपनी रिपोर्ट दी थी, जिसमें 580 खैर के पेड़ों के अवैध कटान की पुष्टि हुई थी ।

  2. नई कमेटी का सर्वे: बाद में मुख्यालय स्तर से बिना वन्य प्राणी वार्डन को सूचित किए एक नई जांच कमेटी गठित की गई । इस कमेटी ने मार्च 2026 में ग्रैनुलर सर्वे (Granular Survey) कर रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कुल 1148 पेड़ों के अवैध रूप से काटे जाने की बात कही गई ।

  3. जांच टीम में शामिल नहीं हुए अधिकारी मगर कर दिए साइन: निलंबित अधिकारी ने सनसनीखेज आरोप लगाया है कि इस जांच कमेटी के चार सदस्यों में से एक वरिष्ठ अधिकारी जांच में शामिल ही नहीं हुए थे, फिर भी रिपोर्ट पर उनके हस्ताक्षर करवाकर सरकार के सामने गलत तथ्य पेश किए गए ।

जमीन वापस लेने की जल्दबाजी, सीसीटीवी हटाने का मसला

  • एरिया वापसी की जल्दबाजी: शिकायत में कहा गया है कि क्षेत्र ट्रांसफर होने के महज 11 दिन के भीतर ही तत्कालीन शीर्ष नेतृत्व ने सरकार को पत्र लिखकर इस प्रोटेक्टिड एरिया को वापस क्षेत्रीय विंग में लेने का अनुरोध शुरू कर दिया था । अधिकारी के अनुसार, ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उच्च अधिकारियों को पहले से ही वहां हो रहे अवैध कटान और माइनिंग का पता था और वे जिम्मेदारी से बचना चाहते थे ।

  • सीसीटीवी कैमरे का सच: मुख्यालय की रिपोर्ट में आरोप था कि वन्य जीव विभाग के स्टाफ ने सुरक्षा नाका और सीसीटीवी (CCTV) कैमरे हटा दिए थे । इसके उलट, शिकायतकर्ता ने लिखित आदेशों का हवाला देते हुए साफ किया कि ये कैमरे वन्य जीव विभाग ने नहीं, बल्कि टेरिटोरियल विंग द्वारा हटाए गए। इसके सबसे बड़ा सबूत 30 सिंतबर 2025 को तत्कालीन वन राजिक अधिकारी द्वारा लिखा गया पत्र भी है। जो सभी वन दरोगा व वन रक्षको को एड्रेस करके लिखा गया।

निलंबित अधिकारी ने खुद को बेकसूर बताते हुए पुलिस रिकॉर्ड का हवाला दिया है:

  • खुद शिकायतकर्ता ने ही मार्च 2026 में पंचकूला पुलिस को पत्र लिखकर इस अवैध कटान मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की थी, जिसके बाद FIR नंबर 0064 दर्ज हुई ।

  • पुलिस और एसआईटी (SIT) की जांच में जिन आरोपियों और स्थानीय वन दरोगा को गिरफ्तार किया गया, उनकी पूछताछ में कहीं भी निलंबित अधिकारी का नाम सामने नहीं आया है ।

  • मई 2026 की SIT रिपोर्ट में स्पष्ट है कि अधिकारी इस मामले में खुद मुदई (शिकायतकर्ता) हैं।

गैर-कानूनी तरीके से केस रफा-दफा करने का आरोप

शिकायतकर्ता ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 का हवाला देते हुए एक और बड़ा कानूनी मुद्दा उठाया है । उनके अनुसार, प्रोटेक्टिड एरिया में पेड़ों का कटान एक गैर-कंपाउंडेबल (Non-compoundable) अपराध है, जिसमें जुर्माना लेकर केस रफा-दफा नहीं किया जा सकता । इसके बावजूद, क्षेत्रीय विंग के अधिकारियों ने पिछले वर्षों (2022 से 2025) के दौरान हुए अवैध कटान के मामलों को गलत तरीके से कंपाउंड (रफा-दफा) कर दिया, जो कि कानून का सीधा उल्लंघन है । इसके अलावा पिंजौर रेंज के HMT एरिया में भी हजारों पेड़ों के अवैध कटान पर कोई कार्रवाई नहीं की गई ।

ससम्मान बहाली और कानूनी कार्रवाई की मांग

निलंबित मण्डलीय वन्य जीव अधिकारी ने पत्र में गुहार लगाई है कि सरकार के सामने इस पूरे प्रशासनिक षड्यंत्र की वास्तविक स्थिति को रखा जाए । उन्होंने मांग की है कि नियमों का उल्लंघन कर गंभीर अपराधों को ‘कंपाउंड’ करने वाले और इस गड़बडी में शामिल दोषी अधिकारियों को तुरंत निलंबित कर व कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, तथा शिकायतकर्ता को ससम्मान सेवा में बहाल कर पुनः पोस्टिंग दी जाए ।

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