कलेसर, यमुनानगर।हरियाणा के ताजेवाला और कलेसर वन्यजीव क्षेत्र से सटे सिंचाई विभाग के एरिया में एक बार फिर ‘वन माफिया’ ने बड़ी सेंधमारी की है। कलेसर रेंज के तहत खिजराबाद ब्लॉक के सेक्शन-4 में ताजेवाला सिंचाई विभाग के कार्यालय के ठीक बगल से 10 से 12 कीमती सफेदे (Eucalyptus) के पेड़ों का अवैध कटान कर दिया गया है। काटे गए पेड़ों की कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है।
हैरानी की बात यह है कि घटना के 4-5 दिन बीत जाने के बाद भी कार्रवाई शून्य है। एक पुरानी शिकायत को आगे रखकर कटान को पुराना बताया जा रहा है। मौके पर कटे हुए पेड़ों के ठूंठ (मुंडियां) चिल्ला-चिल्लाकर गवाही दे रहे हैं कि यह कटान महज 4 से 5 दिन पुराना है। वन विभाग ने इन ताजे ठूंठों पर मार्कर से नंबरिंग (मार्किंग) भी कर दी है। लेकिन, विभागीय आलम देखिए— इस ताजा कटान को छुपाने के लिए सिंचाई विभाग की 3 महीने पुरानी एक शिकायत का सहारा लिया जा रहा है।
क्या है पुरानी शिकायत का खेल?
सिंचाई विभाग के SDO ने 19 मार्च 2026 को थाना प्रबंधक प्रतापनगर को एक शिकायत दी थी। इसमें कहा गया था कि 18 मार्च 2026 की रात को ताजेवाला पावर हाउस के पास से अज्ञात चोरों ने पेड़ काटे। मजेदार बात यह है कि इस 3 महीने पुरानी शिकायत में सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने यह तक नहीं लिखा कि कुल कितने पेड़ चोरी हुए। यानी अधिकारियों के पास अपनी ही जमीन का मौका-मुआयना करने का समय नहीं था। अब इसी अधूरी और पुरानी शिकायत की आड़ में इस हफ्ते हुए नए कटान को छुपाया जा रहा है।
सरकारी सैलरी किस बात की? जनता उठा रही सवाल
जिस जगह पर यह अवैध कटान हुआ है, वहां पौधारोपण (प्लांटेशन) से लेकर उसकी सुरक्षा तक का जिम्मा वन विभाग का है। वन विभाग ने यहाँ बाकायदा ‘रखवाले’ तैनात कर रखे हैं। वहीं जमीन सिंचाई विभाग के अधीन आती है।
इतने संवेदनशील एरिया में, अधिकारियों की नाक के नीचे से लाखों के पेड़ साफ हो गए और किसी को भनक तक नहीं लगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब किसी की जवाबदेही ही तय नहीं है, तो सरकार इन विभागों के कर्मचारियों और अफसरों को लाखों रुपये सैलरी किस बात की दे रही है?
खैरवेली कांड से भी नहीं लिया सबक: सिर्फ सस्पेंशन का ड्रामा!
यह कोई पहला मामला नहीं है। कुछ दिन पहले ही इस घटनास्थल से महज 1 किलोमीटर दूर खैरवेली में बेशकीमती खैर के पेड़ों का अवैध कटान हुआ था। उस समय बदनामी से बचने के लिए वन विभाग ने अपने एक गार्ड को सस्पेंड कर दिया था, लेकिन मामला शांत होते ही उसे गुपचुप तरीके से दोबारा बहाल कर दिया गया।
मुख्यालय तक पहुंची गूंज, पर कार्रवाई सिफर
सूत्रों के मुताबिक, ताजेवाला में हुए सफेदे के इस नए अवैध कटान की पूरी रिपोर्ट वन विभाग के उच्च मुख्यालय तक पहुंच चुकी है। जिसके बाद हलचल हुई, मगर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।





