यमुनानगर (कलेसर):
कलेसर राष्ट्रीय उद्यान और वन्य जीव विहार के पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र (Eco Sensitive Zone) में नियमों को ताक पर रखकर बिना अनुमति के करवाए जा रहे निर्माण कार्य पर वन्य जीव विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। वन्य जीव निरीक्षक (राष्ट्रीय उद्यान, कलेसर) ने यमुना नदी के पास चल रहे भू-संरक्षण (Flood Protection) कार्य को तुरंत रुकवा दिया है और इस मामले में शामिल जिम्मेदार लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में वन्य जीव निरीक्षक द्वारा वन मण्डल अधिकारी एवं सदस्य सचिव (पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र निगरानी समिति, यमुनानगर) को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया गया है। इस एरिया में यमुना किनारे सिंचाई विभाग का 1 हजार फीट का स्टोन स्टीनिंग का काम करवाया जा रहा था। पिछले वर्ष भी यहां बिना अनुमति के काम करवाने का प्रयास किया गया मगर वन विभाग ने काम को रोक दिया था,इस बार फिर से काम चालू करवा दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, कलेसर राष्ट्रीय उद्यान और वन्य जीव विहार के इको सेंसिटिव जोन में किसी भी प्रकार का कार्य करवाने के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक (हरियाणा, पंचकूला कार्यालय) की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। इसके बिना कोई भी गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित है।
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मौके पर चल रहा था कार्य: 4 जून 2026 को वन्य जीव निरीक्षक द्वारा निरीक्षण के दौरान पाया गया कि गांव कलेसर के पास यमुना नदी के किनारे बिना किसी प्रशासनिक व विभागीय अनुमति के बड़े पैमाने पर भू-संरक्षण का कार्य शुरू करवा दिया गया था।
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तुरंत रुकवाया काम: मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने काम को मौके पर ही तुरंत रुकवा दिया।
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सिंचाई विभाग को चेतावनी: इस निर्माण कार्य को लेकर वन्य जीव निरीक्षक ने तुरंत सिंचाई विभाग (Irrigation Department) के अधिकारियों से दूरभाष पर संपर्क कर उन्हें नियमों का हवाला देते हुए रोकने के आदेश दिए।
सख्त कार्रवाई के लिए लिखा पत्र
वन्य जीव निरीक्षक ने पत्र क्रमांक 54 दिनाक 26 मई 2025 के पत्र का हवाला देते हुए उच्चाधिकारियों से अनुरोध किया है कि इस गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन को लेकर संबंधित विभागों को तुरंत कड़े निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही, प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति के कार्य शुरू करवाने वाले लोगों और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए। इस पत्र की प्रतियां आगामी आवश्यक कार्रवाई के लिए सहायक वन संरक्षक (वन्य जीव, यमुनानगर) और जिला भू एवं खनन अधिकारी (यमुनानगर) को भी भेजी गई हैं।
बताया जाता है पिछले वर्ष भी यहां पर सिंचाई विभाग द्वारा इको सेंसटिव जोन में बिना अनुमति के पत्थर का स्टाक आदि लगाना शुरु कर दिया था। जिसके बाद वन विभाग ने न केवल यहां बल्कि चिक्कन में भी काम को रुकवा दिया था। इस संबंध में सिंचाई विभाग को अनुमति लेने के लिए कहा गया था।



