डीएफओ ने डीडीपीओ को एफआईआर के लिए लिखा लेटर तो पंचायत का कहना कि न लिस्ट भेजी न सेक्शन चार के उल्लंघन पर विभागीय कार्रवाई की रिपोर्ट
कलेसर,यमुनानगर। खैर वेली में 14 खैर के पेड़ों के अवैध कटान का मामला जांच के बाद 431 पेड़ों तक पहुंच चुका है। वन विभाग द्वारा की गई जांच में कलेसर खैर वैली में खैर व अन्य प्रजातियों के कुल 431 नए-पुराने कटे हुए पेड़ (मुंडियां) पाए गए हैं। इस खुलासे के बाद वन विभाग की आंख खुली है उसने इस मामले में डीडीपीओ को पत्र भेज कर कलेसर पंचायत को एफआईआर दर्ज कराने के आदेश देने को कहा है, वहीं सरपंच प्रतिनिधि का कहना है कि इस संबंध में एक पत्र तो उन्हें मिला है, जिसमें न तो किस प्रजाति के पेड़ कटे है उसकी लिस्ट है न ही वन विभाग द्वारा सेक्शन -4 में क्या कार्रवाई की गई उसके बारे बताया गया है।
गौरतलब है कि कलेसर में यमुना नदी में स्थित खैर वेली में 3 अप्रैल 2026 को खैर के अवैध कटान का मामला यमुनापोस्ट ने प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद 4 अप्रैल को कलेसर के सरपंच प्रतिनिधि ने अपने चौकीदार के साथ मौके का दौरा किया, जहां पर कटान पाया गया। मगर किसी भी मुंडी पर कोई नंबर अंकित नहीं था, जिसकी फोटोग्राफी उन्होंने स्वंय कर अपने अधिकारियों को सूचित किया। 4 अप्रैल को पीसीसीएफ केसी मीणा भी छछरौली- कलेसर रेंज के दौरे पर पहुंच गए, इसके बाद 5 अप्रैल की सुबह को जब उन्होंने खैर वेली का दौरा किया तो वहां पर अवैध कटान पाया गया। उनके पहुंचने से पूर्व वन स्टाफ ने मुंडियों पर नंबर आदि अंकित कर दिए गए थे।
पीसीसीएफ के दौरे के बाद चली जांच के बाद इस एरिया के फारेस्ट बीट इंचार्ज को 16 अप्रैल 2026 को निलंबित कर दिय गया व ब्लाक इंचार्ज को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया। इस मामले में लगातार पंचायत व वन विभाग का पत्र व्यवहार चलता रहा, जिसमें बीडीपीओ द्वारा 10 अप्रैल को वन राजिक अधिकारी को पत्र लिखकर न केवल अवैध कटान के बारे में पूछा गया बल्कि जंगल से घास-पूले की सफाई की जानकारी भी मांगी गई। पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर इस संबंध में एक एफआईआर भी पुलिस में दर्ज करवा दी गई।
खैर वेली में अब जो नया मामला सामने आया है वह ओर भी अधिक चौंकाने वाला है। इसमें डीएफओ यमुनानगर ने डीडीपीओ यमुनानगर को एक पत्र भेजकर बताया है कि खैर वेली जंगल की जांच के बाद पता चला है कि वहां पर 431 पेड़ो की मुंडिया पाई गई है ओर पंचायत को इस संबंध में एफआईआर करवाने को कहा गया है।
417 पेड़ों के कटान पर FIR करवाने के लिए लिखा
वन मण्डल अधिकारी (DFO), यमुनानगर ने जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (DDPO) को पत्र लिखकर इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने को कहा है। पत्र के अनुसार, जांच में मिलीं कुल 431 मुंडियां नई व पुरानी मिली है। उसमें से 14 पेड़ उस पुरानी एफआईआर (नंबर 0122, दिनांक 17/06/2023) से संबंधित हैं जो ग्राम पंचायत ने पहले थाना प्रतापनगर में दर्ज कराई थी। इन 14 पेड़ों को घटाकर, अब शेष 417 पेड़ों के अवैध कटान के मामले में ग्राम पंचायत कलेसर के सरपंच को नई एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
PLPA की धारा 4 का उल्लंघन
पत्र में बतााया गया है कि यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश की सीमा और यमुना नदी से सटे संवेदनशील क्षेत्र का है। यह इलाका पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम (PLPA)-1900 की धारा 4 के अंतर्गत आता है। इस कानून के तहत पॉपुलर, सफेदा, अमरूद, डैंक और अलन्थस जैसी कुछ चुनिंदा प्रजातियों को छोड़कर बाकी सभी पेड़ों को काटने के लिए वन विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति के पेड़ काटने पर भारतीय वन अधिनियम-1927 की धाराओं के तहत कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाती है।
जांच में हुआ खुलासा
पत्र में कहा गया है कि वन राजिक अधिकारी (रेंज ऑफिसर), कलेसर, स्थानीय स्टाफ और ग्राम पंचायत द्वारा 28 अप्रैल 2026 को की गई जांच में इस भारी नुकसान का पता चला था।
सुरक्षा बढ़ाने और जवाबदेही तय करने के निर्देश
वन मण्डल अधिकारी ने डीडीपीओ से अनुरोध किया है कि वे कलेसर सरपंच को इस संवेदनशील वन क्षेत्र की सुरक्षा बढ़ाने और सरकारी व पंचायत संपत्ति की रक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करने के आदेश दें। साथ ही हिदायत दी गई है कि भविष्य में यदि कोई भी नुकसान होता है, तो उसकी सूचना और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट तुरंत वन विभाग को सौंपी जाए।
वहीं इस मामले में वन विभाग के इस पत्र पर सवाल उठने लगे है कि आखिर पंचायत के अनुसार पिछले कई दशकों से यह एरिया वन विभाग के पास है इसके अलावा प्लांटेशन से लेकर अन्य कार्य वह करवा रहा है, वहां पर विभाग ने रखवाले भी रखे हुए हैं। ऐसे में सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है। यह क्षेत्र पीएलपीए-1900 की धारा 4 के अंतर्गत आता है। ऐसे में सेक्शन चार में विभाग ने क्या कार्रवाई की है,यानी क्या इस मामले में कोर्ट में केस लगाया गया है या कोई अन्य कार्रवाई की गई है।
वन विभाग जहां पंचायत को पत्र लिखकर उसे सुरक्षा करने व सूचित करने को कहा रहा है वहीं एप्लीकेशन संख्या 124/2024 के तहत एनजीटी के एक आदेश भी है जिसमें सबसे बड़ी जिम्मेदारी व जवाबदेही वन विभाग की तय की गई है।
हरियाणा राज्य द्वारा गैर-वन क्षेत्रों में पेड़ों की सुरक्षा के लिए एक उचित नियामक ढांचा (Regulatory Framework) स्थापित होने तक, एनजीटी (NGT) द्वारा निम्नलिखित अंतरिम निर्देश जारी किए गए हैं:
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पेड़ काटने पर प्रतिबंध: कोई भी व्यक्ति किसी भी निजी भूमि, या केंद्र/राज्य सरकार, नगर पालिका, पंचायत प्राधिकरणों, सार्वजनिक संस्थानों या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के स्वामित्व वाली सरकारी भूमि पर खड़े किसी भी पेड़ को नहीं काटेगा। यह नियम छूट प्राप्त श्रेणी/कृषि वानिकी (Agro-forestry) श्रेणी के पेड़ों पर लागू नहीं होगा। पेड़ काटने के लिए संबंधित जिले के विभागीय वन अधिकारी (Divisional Forest Officer – DFO) से अनुमति लेना अनिवार्य है।
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अनुमति के लिए आवेदन: पेड़ काटने की अनुमति के लिए आवेदन संबंधित डीएफओ (DFO) के पास जमा करना होगा। इसमें भूमि का विवरण, स्थान, क्षेत्रफल, सीमाएं, स्वामित्व, कब्ज़ा, काटे जाने वाले पेड़ों की प्रकृति और संख्या के साथ-साथ पेड़ काटने के कारणों का संक्षिप्त विवरण देना होगा।
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समय सीमा: संबंधित विभागीय वन अधिकारी (DFO) ऐसे आवेदनों का निपटारा तेजी से करने का प्रयास करेंगे, जो कि प्राथमिकता के आधार पर 90 दिनों के भीतर आवश्यक निरीक्षण और संबंधित कारकों को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।
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क्षतिपूरक वृक्षारोपण (Compensatory Plantation): पेड़ काटने की अनुमति देते समय, डीएफओ (DFO) यह शर्त लागू करेंगे कि काटे गए एक पेड़ के बदले कम से कम तीन स्वदेशी प्रजातियों/किस्मों के पेड़ आवेदक की भूमि या आदेश में निर्दिष्ट किसी अन्य भूमि पर लगाए जाएंगे। साथ ही, कम से कम 5 वर्षों तक उनका संरक्षण और सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
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उल्लंघन पर जुर्माना (पर्यावरणीय मुआवजा): यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति के अवैध रूप से पेड़ काटता है या क्षतिपूरक वृक्षारोपण की शर्तों का पालन करने में विफल रहता है, तो डीएफओ (DFO) उल्लंघनकर्ता पर पर्यावरणीय मुआवजा (Environmental Compensation) लगाएंगे।
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इस जुर्माने में वन विभाग के दिशानिर्देशों के अनुसार लकड़ी का मूल्य और तीन गुना क्षतिपूरक वृक्षारोपण व 5 साल के संरक्षण के लिए आवश्यक राशि शामिल होगी।
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इस राशि की वसूली के लिए जिला कलेक्टर/उपायुक्त (DC) को रिकवरी सर्टिफिकेट भेजा जाएगा, ताकि इसे भू-राजस्व के बकाया (Arrears of Land Revenue) के रूप में वसूला जा सके। इस राशि का उपयोग मानसून या उपयुक्त मौसम में वृक्षारोपण और संरक्षण के लिए किया जाएगा।
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वहीं इस मामले में जब कलेसर के सरपंच प्रतिनिधि ज्ञान सिंह से पूछा गया तो उनका कहना था कि उनको एक पत्र की कापी मिली है जिसमें वन विभाग की ओर से 417 पेड़ों के कटान के बारे में बताया गया है ओर इस पर एफआईआर दर्ज कराने को कहा गया है। मगर इस कापी के साथ न तो कटे पेड़ों की कोई लिस्ट है जिसमें कटे पेड़ों की प्रजाति का वर्णन किया गया हो न ही यह बताया गया है कि विभाग ने सेक्शन चार के उल्लंघन में क्या कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि केवल पेड़ ही नहीं यहां पर घास-पूले से लेकर पत्तो का कटान भी हुआ है। इसलिए मामला केवल पेड़ों तक सीमित नहीं है। बाकी वह अपने अधिकारियों से विचार-विर्मश करके ही आगामी कार्रवाई करेंगे।



