जगाधरी। बाढ़ से बचाव के लिए सिंचाई विभाग के कार्यों को लेकर इस बार भी सवाल उठने शुरु हो गए हैं। कई जगह अभी पत्थर पूरा नहीं पहुंचा है तो कई जगह छोटे पत्थर का स्टाक किया गया है। वहीं इस बार जो सबसे बड़ा सवाल है कि क्या पिछली बार की तरह इस बार भी काम अधूरे ही रहेंगे या पूरे हो जाएंगे। एक ओर बड़ा सवाल है कि सारा पत्थर तो ताजेवाला व उसके आस-पास से निकाला जा रहा है जहां पर कोई खनन साइट नहीं है। पिछली बार विजिलेंस विंग की जांच में भी पत्थर की रायल्टी न जमा कराए जाने से 2.12 करोड़ का राजस्व का नुकसान हुआ था, क्या इस बार खनन विभाग व सिंचाई विभाग इस ओर गौर कर रहा है।

सिंचाई विभाग के बीते कुछ वर्षों से करवाए जा रहे बाढ़ बचाव के कार्य लगातार सवालों के घेरे में रहे है। पिछले साल तो विभाग की विजिलेंस ने ही सिंचाई विभाग के कामों की कमियों को उजागर कर दिया था। जिसमें सबसे बड़ा मामला पत्थर की रायल्टी चोरी का था। इसके अलावा कई तकनीकी कमियां इस बार भी देखी जा रही है। खानूवाला एरिया में नदी में पत्थर का जो स्टाक लगाया गया है उसमें ऊपर से ही दिखाई दे रहा है कि पत्थर का साइज कितना छोटा है। ग्रामीण बताते है कि यहां पर पिछले साल भी काम पूरा नहीं हो पाया था व इस साल भी काम अभी चालू नहीं किया गया है।

आमतौर पर यह देखा गया है कि ठेकेदार पत्थर की उपलब्धता न होने का बहाना आदि बनाकर काम अधूरा छोड़ देते हैं व ई-रवाना आदि जमा नहीं करवाते है मगर इस बार टेंडर में कुछ स्पैशल कंडीशन्स रखी गई है जिसमें :

पत्थर, बोल्डर की उपलब्धता: एजेंसी निविदा में दरों को भरने से पहले पत्थर के बोल्डर की कुल मात्रा की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। बाद के चरण में बोल्डर की अनुपलब्धता का कोई बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। साइट पर पत्थर के बोल्डर को तभी स्वीकार किया जाएगा जब उसके साथ वैध परिवहन बिल (Carriage bill) संलग्न हो। प्वायंट चार पर रखी गई यह शर्त का मतलब है कि कैरिज बिल यानी ई-रवाना का होना जरुरी है। ऐसे में ई-रवाना क्या वाकई में लिया जा रहा है, क्योंकि जिस साइट पर पत्थर है वहां पर कोई वैध खनिज घाट नहीं है।

रायल्टी वसूलने का काम खनन विभाग का होता है मगर खनन विभाग की चुप्पी के बावजूद विभाग की विजिलेंस ने ही जांच कर राजस्व को रायल्टी के रुप में लगभग सवा दो करोड़ के नुकसान की पुष्टि कर दी थी। इस बार भी क्या सिंचाई विभाग व खनन विभाग इस ओर ध्यान दे रहा है।

वहीं एक जो बड़ा मामला है वह पत्थर के स्टाक की चेकिंग का है। इस फील्ड से जुड़े लोगों का कहना है कि किसी भी बाढ़ बचाव के काम से पूर्व जो पत्थर मंगाया जाता है उसका पहले स्टाक किया जाता है। इस स्टाक में ही सबसे बड़ा खेल कर दिया जाता है जिसमें स्टाक चारों ओर पत्थर लगा दिया जाता है बीच में मिटटी आदि भर कर उसके ऊपर कुछ पत्थर की तह जोड़ दी जाती है जब पत्थर की पैमाइश होती है तो वह चारों कार्नर से होती है बीच में से खोद कर देखा नहीं जाता है ऐसे में पत्थर की कमी का पता नहीं चलता। इसलिए जितने भी स्टाक लगाए गए हैं उसकी अगर सही से जांच कर पैमाइश की जाए तो ओर बहुत सी परतें खुल सकती हैं।

इस बारे में सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता प्रवीण गुप्ता से जब पूछा गया तो रायल्टी व ई -रवाना के बारे में बताया कि उन्होनें जब भी कार्यकारी अभियंताओं से पूछा तो उनका कहना है कि जो भी पत्थर आ रहा है , उसका ई-रवाना आ रहा है वहीं जब पत्थर के साइज के बारे में बात की गई तो उनका कहना था कि वह चेकिंग करवा लेते हैं जहां पर छोटा पत्थर आ रहा है। कुछ कमी पाई गई तो आगामी कार्रवाई होगी। 

 

 

Sharing

Leave a Reply

error: Content is protected !!