प्रतापनगर, यमुनानगर।  मांडेवाला गांव के समीप टाइल फैक्ट्री के समीप से जो रास्ता ताजेवाला जा रहा है। उस कच्चे रास्ते के एक साइड में ताजेवाला तक पूरी तरह अवैध खनन का काम चल रहा है। दिन के उजाले में हो रहे इस अवैध खनन से 50 फुट से भी ज्यादा गहरी खाईयां बन चुकी है। इतना गहरा अवैध खनन होने के बावजूद इन खाईयों को अवैध खनन कर ओर अधिक गहरा किया जा रहा है। खनन विभाग का स्टाफ पूरी तरह से नींद में है। जिन खनन कर्मचारियों की यहां पर डयूटी है वह मौके पर आते तक नहीं तो खनन अधिकारी किसी का फोन उठाते नहीं है।

मांडेवाला व आस-पास एरिया में बने स्क्रीनिंग प्लांटों व क्रशर्स के कच्चे माल का जरिया इस एरिया में हो रहा अवैध खनन ही है। इस एरिया में अवैध खनन से मांडेवाला से लेकर ताजेवाला सीमा तक एक नई नहर बनाई जा चुकी है, यानी एक ही साइड में इतना अधिक अवैध खनन हो चुका है। वह नहर का रुप ले चुकी है। अगर इस एरिया की सही तरीके से पैमाइश हो जाए तो यहां पर सैकड़ों करोड़ के अवैध खनन की पुष्टि हो जाएगी, जिसे आस-पास के स्क्रीनिंग प्लांट मालिक ही करवा रहे है। इसके साथ ही सुबह होते ही एचएम व जेसीबी मशीनों से यहां पर अवैध खनन चालू हो जाता है। सारा रास्ता अवैध खनिज से भरी गाड़ियों से दिन भर गुलजार रहता है। मगर न तो कोई खनन विभाग का कर्मचारी इधर आता है न ही किसी अन्य विभाग का।

किस बात की सैलरी दी जा रही है खनन विभाग के कर्मचारियों को 

इस एरिया में लगातार खनन विभाग के कर्मचारियों की डयूटी रहती है। अवैध खनन दिन में आते-जाते हर व्यक्ति को दिख जाता है मगर खनन कर्मचारियों को नहीं दिखता। न ही खनन स्टाफ किसी का फोन उठाता है न ही खुद जिला खनन अधिकारी किसी का फोन उठाते हैं। ताकि न किसी की समस्या सुननी पड़े न ही कोई कार्रवाई करनी पड़े।

केवल अवैध खनन रोकना नहीं, जिस एरिया में जिस कर्मचारी की डयूटी है वह अगर कार्रवाई नहीं कर रहा ओर रिपोर्ट नहीं कर रहा है तो उससे अवैध खनिज में चोरी किए मैटिरियल की कीमत की रिकवरी की जानी चाहिए।

इस बारे में जब एनफोर्समेंट ब्यूरो के एक एएसआई से बात की गई तो उनका कहना था कि सूचना मिलते ही टीम रवाना का दी गई है। जो भी कार्रवाई बनेगी वह की जाएगी। ब्यूरो की टीम लगातार कार्रवाई कर रही है।

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