• पीएलपीए सेक्शन चार एरिया पंचायती जमीन में अवैध कटान का मामला, डीएफओ ने की कार्रवाई

कलेसर, यमुनानगर। कलेसर खैरवैली में अवैध कटान के मामले में वन विभाग ने कलेसर रेंज के संबधित फारेस्ट गार्ड को सस्पेंड कर दिया है इसके साथ ही उस एरिया के ब्लाक इंचार्ज को 7 दिन के अंदर नोटिस का जवाब देने को कहा गया है। अवैध कटान के बाद 5 अप्रैल को पीसीसीएफ ने खैरवैली का दौरा किया था। जहां मौके पर अवैध कटान पाया गया। इस संबंध में बीडीपीओ ने पुलिस स्टेशन प्रतापनगर में कार्रवाई के लिए पहले ही लिख दिया था। हालांकि वन विभाग अब पल्ला झाड़ने के लिए इस एरिया को यूपी क्षेत्र बताने का प्रयास भी कर रहा है।

कलेसर की खैर वैली जो फारेस्ट रेंज आफिस के बिल्कुल नजदीक यमुना नदी में पड़ती है। यहां पर लगातार खैर का कटान चल रहा था। 4 अप्रैल को सूचना मिलने पर सरपंच प्रतिनिधि व गांव के चौकीदार ने मौके का दौरा किया। जहां पर बड़ी संख्या में अवैध कटान मिला। मगर जो नया कटान हुआ था उनकी मुंडियो पर कोई नंबर आदि अंकित नहीं था। इसके बाद 5 अप्रैल 2026 को पीसीसीएफ केसी मीणा ने खैर वैली का दौरा किया व वहां पर अवैध कटान पाया गया। जिसके कई दिन बाद तक विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसी दौरान कलेसर पंचायत ने एक प्रस्ताव के माध्यम से इसकी एक शिकायत बीडीपीओ को कर दी। बीडीपीओ ने पंचायत के प्रस्ताव के बाद पुलिस स्टेशन प्रतापनगर में इस मामले की शिकायत देकर कार्रवाई करने को कहा है।

उधर लगतार मामला बढता देख वन विभाग भी हरकत में आ गया ओर डीएफओ ने अपने पत्र क्रमांक 94-98 के तहत इस एरिया के वन रक्षक टेकचंद को संस्पेड़ कर दिया। पत्र में कहा गया कि वन रक्षक ने कटान के बाद समय रहते कार्यवाही नहीं की। इसके साथ ही यह मामला डीएफओ के नोटिस में भी नहीं लाया गया न ही इस संबंध में मंडल कार्यालय को रिपोर्ट की गई। वहीं पत्र क्रमांक 271 के तहत विभाग ने प्रतापनगर ब्लाक के इंचार्ज संदीप को कारण बताओ नोटिस जारी किया ओर सात दिन में इसका जवाब देने को कहा गया।

अब जो असली खेल चल रहा है, वह है पल्ला झाड़ने का

इस एरिया को कलेसर पंचायत की भूमि बताया जाता रहा है, जहां पर लगभग 150 एकड़ में यह खैर वैली है। जहां पर वन विभाग का सेक्शन 4 लगता है, यानी वन विभाग की कार्रवाई का अधिकार बनता है। मगर वन विभाग अब इस एरिया को यूपी क्षेत्र बताने का प्रयास कर रहा है। वन दरोगा को भेजे नोटिस में इसका जिक्र किया गया है। जिसमें कहा गया है कि गूगल मैप में ज्यादातर एरिया उतर प्रदेश में दर्शाया प्रतीत होता है। उक्त भूमि पंचायती भूमि व निजी भूमि है। हालांकि पंचायत इसे अपनी भूमि मानने से इंकार नहीं कर रही।

मगर सवाल यह है कि आखिर जब पिछले कई दशक से वन विभाग वहां पर प्लांटेशन कर रहा है अन्य कार्य कर रहा है। अपने रखवाले तक वहां पर तैनात किए हुए हैं तो आखिर क्या यूपी क्षेत्र में प्लांटेशन के लिए उच्चअधिकारियों से अनुमति ली गई। आज जिस क्षेत्र को हरियाणा क्षेत्र मानने पर सवाल खड़े किए जा रहे है आज तक जो बजट उस क्षेत्र पर खर्च किया गया तो क्या उसकी रिकवरी नहीं बनती है। केवल जवाबदेही के वक्त रवैया बदल लेना आखिर कहां तक जायज है। इसके अलावा ओर बहुत से सवाल है।

वहीं पिंजौर के सेक्शन चार एचएमटी एरिया में जहां पर विभाग ने स्वंय कई बार पुलिस को शिकायत देकर एफआईआर करवाई है, पुलिस ने इस पर बड़ी कार्रवाई भी की है। वह एरिया भी तो एचएमटी या हरियाणा अर्बल डेवलपमेंट अथारिटी के अंतर्गत आता है। तो क्या पिंजौर से कलेसर आते आते नियम कानून घिस जाते हैं। बार-बार पंचायत का एरिया बता अब यूपी का बता बचने का प्रयास क्यों किया जा रहा है। अगर एरिया यूपी का है तब भी जवाबदेही है कि दूसरे प्रदेश की जमीन पर प्लांटेशन या अन्य कार्यो के लिए बजट क्यों खर्च किया गया।

 

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