यमुनानगर (गुमथला-जठलाना):  गुमथला-जठलाना क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे खनन ने न केवल पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) को खतरे में डाल दिया है, बल्कि करोड़ों की लागत से बने नगली ब्रिज (Nagli Bridge) की उम्र पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। पुल का अभी उदघाटन भी नहीं हुआ है। वहीं पीडब्लयूडी बीएंडआर के अधिकारी खनन विभाग को पत्र भेजकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। वहीं सिंचाई विभाग के एक अधिकारी का कहना है पुल के नीचे से रास्ते के लिए बीएंडआर की जिम्मेदारी है जबकि नदी के बीच में रेत खनन के लिए रास्ते के लिए सिंचाई विभाग ने अनुमति दी हुई है।

ब्रिज की ‘स्ट्रक्चरल इंटीग्रिटी’ पर मंडराता संकट

नियमों के विपरित हो रहे खनन के खिलाफ लगातार अपनी मुहिम छेड़े एडवोकेट वरयाम सिंह का कहना है कि नगली ब्रिज के बिल्कुल समीप हो रहे खनन ने तकनीकी विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। सबसे गंभीर विषय यह है कि पुल के नीचे से ओवरलोड वाहन लगातार गुजर रहे हैं, निरंतर होने वाले इस वाइब्रेशन (Vibration) और अनियंत्रित भार से भविष्य में पुल की संरचनात्मक अखंडता (Structural Integrity) को अपूरणीय क्षति हो सकती है।

हाइड्रोलॉजिकल डिस्रप्शन: नदी की धारा से खिलवाड़

खनन माफियाओं ने अपनी सुविधा के लिए यमुना नदी के भीतर एक्सेस रूट (कच्चे रास्ते) तैयार कर लिए हैं। तकनीकी रूप से इसे ‘हाइड्रोलॉजिकल डिस्रप्शन”Hydrological Disruption’ कहा जाता है। नदी की प्राकृतिक धारा को  मलबे से बांधकर रास्ता बनाने के कारण जल प्रवाह का मार्ग बदल गया है। मानसून के दौरान यह स्थिति ‘फ्लैश फ्लड’ (Flash Flood) और भारी ‘सॉइल इरोजन’ (मृदा अपरदन) का कारण बन सकती है, जिससे आसपास के कृषि क्षेत्र जलमग्न हो सकते हैं।

प्रशासनिक विफलता: विभागों की ‘मौन’ सहमति?

इस पूरे प्रकरण में सिंचाई विभाग (Irrigation Department) की भूमिका पर सवाल है। नदी के प्रवाह को बाधित करना सही नहीं है, फिर भी विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। वहीं, खनन विभाग (Mining Department) की उपस्थिति धरातल पर शून्य नजर आ रही है।

विभाग खेल रहा है पत्र-पत्र का खेल

सिंचाई व खनन विभाग तो आंखे मूंद बैठे ही है, वहीं पीडब्लयूडी बीएंडआर विभाग भी केवल कागजी खानापूर्ति कर रहा है। शिकायतकर्ता के पास जून 2024 का भी पत्र है जिसमें बीएंडआर ने ख्रनन अधिकारी को लिखा है इसके साथ ही जून 2018 का भी पत्र जिसमें इस तरह की गतिविधियों पर चिंता जताई गई है। मगर चिंता जताने के अलावा किसी विभाग ने कुछ नहीं किया।

प्रमुख तकनीकी चिंताएं:

  • बफर ज़ोन का उल्लंघन: पुल और तटबंधों के निर्धारित बफर ज़ोन के भीतर खनन।
  • ओवरलोडिंग: सड़कों और पुलों के डिजाइन मानदंडों के विपरीत भारी माल का परिवहन।

निष्कर्ष: यमुना के सीने पर चल रही इस प्रकार की गतिविधि केवल पर्यावरण का नुकसान नहीं है, बल्कि सरकारी संपत्ति और जनजीवन के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है। जिला प्रशासन ने इस नेटवर्क को ध्वस्त नहीं किया और ओवरलोडिंग पर लगाम नहीं लगाई, तो आगामी मानसून में इसके भयावह परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

यमुना के बीच अस्थाई रास्तों के लिए दी है मंजूरी : सिंचाई विभाग

इस बारे में सिंचाई विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि जहां तक पुल के नीचे से खनिज सामग्रीे से भरे वाहनों के गुजरने का सवाल है तो यह बीएंडआर के अधिकार क्षेत्र में आता है, जबकि जो रास्ते नदी के बीच जो अस्थाई रास्ते बनाए गए है। उन्होंने रेत खनन के लिए संबधित एजेंसी को अनुमति दी हुई है।

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