यमुनानगर/जगाधरी: नगर योजनाकार विभाग के तमाम दावों, FIR और डिमोलिशन (तोड़फोड़) के बावजूद यमुनानगर जिले में अवैध कॉलोनियों का कारोबार थमता नजर नहीं आ रहा है। जगाधरी से लेकर बिलासपुर और रादौर से लेकर सढौरा, सरस्वती नगर- छप्पर से लेकर छछरौली तक, भू-माफिया सरकारी खजाने और आम आदमी की जेब पर सरेआम डाका डाल रहे हैं।

🔴 क्यों बेखौफ हैं अवैध कॉलोनाइजर?

  • नाममात्र की कार्रवाई: विभाग द्वारा की जाने वाली तोड़फोड़ केवल ‘खानापूर्ति’ बनकर रह गई है। कच्ची सड़कें उखाड़कर या इक्का-दुक्का बाउंड्रीवॉल गिराकर ‘टारगेट अचीव’ कर लिया जाता है, जबकि कॉलोनी का काम बदस्तूर जारी रहता है।

  • सूचनाओं में पारदर्शिता का अभाव: टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग कार्रवाई के बाद जो प्रेस नोट जारी करता है, उसमें न तो कॉलोनी का खसरा नंबर होता है और न ही सटीक लोकेशन न ही मालिक या कोलोनाइजर का नाम। इससे आम जनता को पता ही नहीं चल पाता कि किस जमीन पर निवेश करना खतरे से खाली नहीं है।

  • सरकारी राजस्व को करोड़ों की चपत: एक वैध कॉलोनी के लिए भारी लाइसेंस फीस और विभिन्न विभागों से NOC लेनी होती है। अवैध कॉलोनाइजर इन नियमों को ठेंगा दिखाकर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगा रहे हैं।

  • कार्रवाई में देरी संदेह के घेरे में : शो-कॉज नोटिस से लेकर FIR दर्ज होने या डिमोलेशन कार्रवाई के बीच इतना लंबा समय दिया जाता है कि कॉलोनाइजर अपना ‘माल’ (प्लॉट) बयाने पर बेचकर निकल जाते हैं। अंत में हाथ मलने का काम केवल उस आम आदमी का रह जाता है जिसने अपनी गाढ़ी कमाई वहां फंसा दी होती है।

  • बिना एनओसी एनएच व स्टेट हाइवे किनारे बन रही कालोनियां: नेशनल और स्टेट हाईवे से लेकर लिंक रोड तक, खेती की जमीन को बिना किसी अनुमति के धड़ल्ले से रिहायशी और कमर्शियल प्लॉट में बदला जा रहा है।


⚠️ अधिकारियों का पक्ष :सख्ती से देंगे निर्देश

इस गंभीर मामले पर STP पंचकूला सतीश पूनिया ने स्पष्ट किया है कि:

“भविष्य में डिमोलिशन के बाद जारी होने वाली प्रेस रिलीज में कॉलोनी का खसरा नंबर, मालिक का नाम और सटीक एरिया की जानकारी देने के निर्देश देंगे। इससे जनता को समय रहते सही सूचना मिलेगी और भू-माफियाओं की पहचान उजागर होगी।”

यदि प्रशासन ने समय रहते सख्त और पारदर्शी कदम नहीं उठाए, तो यमुनानगर का भविष्य अनियोजित विकास और कानूनी विवादों के मकड़जाल में फंस जाएगा। विभागीय अधिकारियों की ढुलमुल कार्यप्रणाली ही भू-माफियाओं के लिए ‘ऑक्सीजन’ का काम कर रही है।

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