
जगाधरी। जगाधरी-खारवन रोड पर इन दिनों मिट्टी से भरी ओवरलोड और बिना नंबर की ट्रैक्टर-ट्रालियां बेखौफ दौड़ती नजर आ रही हैं। दिनभर बिना ढके मिट्टी का परिवहन होने से सड़क पर धूल और मिट्टी बिखरती रहती है, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा ट्रैक्टर-ट्रालियों के कमर्शियल उपयोग पर रोक के दावे जमीनी स्तर पर पूरी तरह विफल दिखाई दे रहे हैं।
कंट्रोल्ड एरिया में अवैध खनन
समता योग आश्रम से गढ़ी एरिया तक का क्षेत्र नगर निगम के अंतर्गत आता है, जबकि इसके आगे कंट्रोल्ड एरिया घोषित है। नियमों के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में बिना अनुमति और कंट्रोल्ड एरिया में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की पूर्व स्वीकृति के बिना किसी प्रकार का खनन कार्य नहीं किया जा सकता।
इसके बावजूद सड़क किनारे और उपजाऊ कृषि भूमि पर बड़े पैमाने पर मिट्टी का खनन जारी है। कंट्रोल्ड एरिया नोटिफिकेशन में स्पष्ट शर्तों के बावजूद खनन विभाग द्वारा परमिट जारी किए जाने और अन्य विभागों की निष्क्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ओवरलोड वाहनों से बढ़ रहा खतरा
सड़क पर दिनभर ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रालियां तेज रफ्तार से दौड़ती हैं। इनसे गिरती मिट्टी के कारण सड़क पर धूल उड़ती रहती है, जिससे दोपहिया चालकों, साइकिल सवारों और पैदल यात्रियों को भारी दिक्कत होती है। हल्की बारिश के बाद सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है, जिससे फिसलकर चोटिल होने की घटनाएं बढ़ रही हैं।
हाल ही में रात के समय एक मोटरसाइकिल सवार को मिट्टी से भरी ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्राली ने टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। इसके बावजूद न आरटीए, न पुलिस और न ही खनन विभाग की ओर से कोई सख्त कार्रवाई नजर आ रही है।
बिना ई-रवाना कैसे हो रहा परिवहन?
बताया जा रहा है कि इस मार्ग पर स्थित ईंट-भट्टों और शहर में बन रही वैध-अवैध कॉलोनियों में भराव के लिए इसी मिट्टी का उपयोग किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रालियों पर रजिस्ट्रेशन नंबर तक नहीं हैं, जबकि बिना नंबर के ई-रवाना जारी नहीं हो सकता।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बिना ई-रवाना के इतने बड़े पैमाने पर मिट्टी का परिवहन कैसे हो रहा है? खनन विभाग और आरटीए की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।





