
यमुनानगर (कलेसर): हरियाणा के यमुनानगर जिले में स्थित कलेसर नेशनल पार्क क्षेत्र से पर्यावरण संरक्षण की धज्जियां उड़ाने वाला मामला सामने आया है। हथिनीकुंड बैराज के बेहद करीब स्थित 150 एकड़ में फैले ‘बेली जंगल’ में अवैध कटान अब खैर के पेड़ों से आगे बढ़कर घास-पूले और पत्तों तक पहुँच गया है। वहीं बताया जाता है कि वन विभाग के लोकल स्टाफ ने सीनियर्स को जो रिपोर्ट की है उसमें जंगल को पंचायत के अधीन बता कर अपना पल्ला झाड़ लिया है, ओर जंगल में तीन-चार पेड़ों का कटना बताया है।
मुख्य तथ्य और वर्तमान स्थिति
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क्षेत्रफल: लगभग 150 एकड़ में फैला टापू नुमा जंगल।
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लोकेशन: हथिनीकुंड बैराज से मात्र 500 से 700 मीटर अपस्ट्रीम में यमुना नदी के बीच स्थित।
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नुकसान: खैर के बेशकीमती पेड़ों की चोरी के बाद अब लाखों रुपये की कीमत का घास-पूला, पेड़ों के पत्ते और टहनियां भी गायब कर दी गई हैं।
- नियमानुसार, घास-पूले की कटाई के लिए लाखों रुपये की नीलामी की जाती है, लेकिन यहाँ बिना किसी टेंडर के सब कुछ ‘साफ’ कर दिया गया।
1. पंचायत का रुख: ग्राम पंचायत कलेसर के सरपंच प्रतिनिधि ज्ञान सिंह का स्पष्ट कहना है कि पंचायत ने न तो कोई घास कटवाई है और न ही पेड़ों की छंटाई की है। उनका कहना है कि
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वन विभाग इस क्षेत्र की देख-रेख के लिए जिम्मेदार है।
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राजस्व विभाग (Revenue Dept) बार-बार लिखने के बावजूद जमीन की पैमाइश और निशानदेही नहीं कर रहा है।
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पंचायत अब बीडीपीओ (BDPO) को औपचारिक प्रस्ताव भेजकर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही है।
संवेदनशीलता और सुरक्षा पर सवाल
यह जंगल न केवल पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि अन्य तरह से भी संवेदनशील है:
“हथिनीकुंड बैराज जैसे महत्वपूर्ण ढांचे से चंद मीटर की दूरी पर इतनी बड़ी अवैध गतिविधि का चलना सुरक्षा तंत्र पर भी सवाल खड़े करता है। यदि कार्यालय के पास यह हाल है, तो दूर-दराज के भीतरी जंगलों की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।”
जाँच की मांग
मामला अब पीसीसीएफ (PCCF) कार्यालय के संज्ञान में है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों की मांग है कि किसी उच्च स्तरीय अधिकारी द्वारा मौके पर जाकर निष्पक्ष जांच की जाए।




