बेलगढ़, यमुनानगर : प्रशासनिक दावों की फाइलों में भले ही यमुना सुरक्षित हो, लेकिन बेलगढ़ की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहाँ उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सीमा पर खनन माफिया ने एक ऐसा ‘समानांतर सिस्टम’ खड़ा कर दिया है, जहाँ सरकारी नियम नहीं, बल्कि माफिया का रसूख चलता है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी तटबंध पटरी को ढाल बनाकर माफिया ने नदी के सीने तक पहुँचने के लिए अपने ‘निजी हाईवे’ (कच्चे रास्ते) तैयार कर लिए हैं।

1. सूर्यास्त के बाद शुरू होता है ‘महा-खनन’ का तांडव

बेलगढ़ में अवैध खनन का खेल किसी छिपकर होने वाली घटना जैसा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित उद्योग की तरह चल रहा है। शाम ढलते ही यमुना के शांत आंचल में जेसीबी मशीनों का शोर गूंजने लगता है। रात भर नदी के बीचों-बीच से खनिज सामग्री (रेत और पत्थर) निकालकर ट्रैक्टर-ट्रालियों और डंपरों का काफिला चलता है। यह सिलसिला सुबह तक जारी रहता है, ताकि उजाला होने से पहले सारा ‘काला माल’ ठिकाने लगा दिया जाए।

2. स्टोन क्रशर: अवैध माल खपाने की सुरक्षित पनाहगाह

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि हरियाणा की सीमा में स्थित कुछ स्टोन क्रशर पूरी तरह से इस अवैध खेल की रीढ़ बने हुए हैं। यमुना से निकला कच्चा माल सीधे इन क्रशरों पर डंप किया जाता है। नियमानुसार, किसी भी क्रशर पर आने वाले माल का रिकॉर्ड और ‘ई-रवाना’ (e-Rawana) होना अनिवार्य है, लेकिन यहाँ बिना किसी रोक-टोक के अवैध स्टॉक जमा किया जा रहा है। यदि औचक निरीक्षण किया जाए, तो क्रशरों पर मौजूद स्टॉक और कागजी रिकॉर्ड का अंतर माफिया और अधिकारियों की पोल खोल सकता है।

3. माइनिंग गार्ड्स पर सवाल

क्षेत्र की सुरक्षा के लिए तैनात माइनिंग गार्ड्स की भूमिका सबसे बड़े सवालों के घेरे में है। दिन-रात ड्यूटी पर तैनात होने के बावजूद अवैध खनन चलता है, लेकिन कार्रवाई शून्य है। इतना ही नहीं, ये लोग स्थानीय लोगों या शिकायतकर्ताओं का फोन तक उठाना जरूरी नहीं समझते।

4. 25 करोड़ का निवेश और डूबने का खतरा

सिंचाई विभाग ने करीब 25 करोड़ रुपये खर्च कर जिस पटरी को ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए पक्का करवाया था, माफिया ने उसे ही अपने परिवहन का रास्ता बना लिया है। पटरी के ऊपर से भारी वाहनों के गुजरने और नदी के बहाव के पास से मिट्टी हटाने के कारण यमुना की धारा बदलने का खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों में डर है कि यदि मानसून से पहले ये अवैध रास्ते बंद न हुए और नदी का कटाव बढ़ा, तो करोड़ों की लागत से बनी पटरी ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी।

5. प्रशासनिक सुस्ती: ‘खाई’ खोदी, पर दूसरे रास्ते से आने लगा कच्चा माल

सिंचाई विभाग के जगाधरी डिविजन के एक्सईएन राहिल सैनी का कहना है कि उन्होंने एक दिन पहले ही रास्ते बंद करने के लिए खाई खुदवाई थी। यदि कोई ओर रास्ता चल रहा है तो मैं संबंधित एसडीओ को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दे रहा हूँ

 माफिया ‘बॉर्डर’ का फायदा उठाकर एक राज्य से दूसरे राज्य में आसानी से निकल जाता है।


तीखे सवाल :

  • मौन क्यों है खनन विभाग? जब रात भर ट्रैक्टर-ट्रालियां चलती हैं, तो माइनिंग गार्ड्स की गश्त कहाँ होती है?

  • क्रशरों की जाँच क्यों नहीं? जिन 3-4 क्रशरों का नाम बार-बार सामने आ रहा है, उनके स्टॉक की फिजिकल वेरिफिकेशन से प्रशासन क्यों कतरा रहा है?

  • गार्ड्स पर कार्रवाई कब? जो गार्ड्स शिकायत पर फोन तक नहीं उठाते, उनकी जवाबदेही कब तय होगी

निष्कर्ष: बेलगढ़ की यह स्थिति चीख-चीख कर कह रही है कि यहाँ अवैध खनन रोकने का दावा केवल कागजों तक सीमित है। यदि उच्च अधिकारियों ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह अवैध खनन न केवल सरकार को राजस्व की चपत लगाएगा, बल्कि भविष्य में किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा का कारण भी बनेगा।

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