यमुनानगर। उपमंडल छछरौली के मांडेवाला फारेस्ट के दक्षिण व देवधर फारेस्ट के पूर्व की ओर यमुना नदी के किनारे समीप बेलगढ़ में 40 से 50 एकड़ में रात के समय चल रहा अवैध खनन उन तमाम दावों की पोल खोल रहा है। जिसका जिक्र डीएलटीएफ की बैठकों में खनन विभाग के अधिकारी बार-बार करते रहे हैं। बेलगढ़ बांध से अपस्ट्रीम में खनन माफिया ने यमुना के साथ-साथ इतना नजदीक से खुदाई कर दी है कि यमुना व खुद चुके खेतों के बीच फासला 200 से 300 मीटर तक मुशिकल से रह गया है, यानी बाढ़ का एक ओर रास्ता तैयार कर दिया गया है। पिछले कई माह से लगातार यहां पर अवैध खनन चल रहा है। बुधवार को छछरौली एसडीएम, डीएफओ, तहसीलदार समेत फारेस्ट कर्मचारी मौके पर पहुंचे।
कुछ माह पहले ही मानसून सीजन में यमुना में आए उफान की वजह से दर्जनों एकड़ जंगल की जमीन यमुना में समा गई। उससे नीचे की ओर देवधर जंगल से थोड़ी दूरी के एरिया में खनन माफिया ने इतना व्यापक पैमाने पर अवैध खनन कर दिया है कि यहां से यमुना की दूरी 300 मीटर से भी कम रह गई है। पिछले कई माह से लगातार अवैध खनन के चलते करोड़ों का मैटिरियल चोरी हो गया है मगर खनन विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा हुआ है।
बेलगढ़ पटरी से अपस्ट्रीम में यमुना से अवैध खनन कर बाढ़ के पानी की एंट्री का सीधा रास्ता बना
बेलगढ़ पटरी से उतर की ओर यानी ऊपर की ओर जंगल के बिल्कुल नजदीक से खनन माफिया ने यमुना से सीधा रास्ता बेलगढ़ की ओर बना दिया है, यानी अब अगर पानी आया तो यहां से सीधा पानी बेलगढ़ में एंट्री करता हुआ दर्जनों गांवों मे तबाही मचा सकता है। यह पानी बेलगढ़ की पटरी को बायपास करता हुआ सीधा अंदर की ओर एंट्री करेगा। सिंचाई विभाग द्वारा वितिय वर्ष 2024-25 में पटरी पर 30 से 40 करोड़ खर्च किए है उसका भी कोई लाभ नहीं होगा।रात के समय बड़ी-बड़ी मशीनों से यहां पर अवैध खनन कच्चा माल आस-पास के क्रशिंग व वाशिंग प्लाटों पर ले जाया जाता है।
खनन विभाग का फेलियर, हर साइट पर अवैध खनन मगर कहीं नहीं दिखता स्टाफ
यमुना नदी के साथ लगती इतनी सेंसटिव साइट पर अवैध खनन के मामले में खनन विभाग ने क्या किया है इसका कोई पता नहीं है। ड्रिस्टिक लेवल टास्क फोर्स की मीटिंग में खनन विभाग के अधिकारी जो आंकड़े दिखाते है, धरातल पर हालत उससे उल्ट ही है। मजेदार बात यह है कि खनन अधिकारी से लेकर कोई माइनिंग गार्ड तक भी किसी का फोन नहीं उठाता। ऐसे में किसी की जवाबदेही तक नहीं होती।
प्लांटेशन के साथ-साथ हुआ अवैध खनन, पेड़ों की जड़े भी दिख रही है
यह पूरा एरिया देवधर जंगल के समीप पड़ता है। यहां पर जिस स्थान पर माइनिंग हुई है वहां पर कुछ साल पहले ही प्लांटेशन की गई है। हालांकि वन विभाग इसे अपनी जमीन नहीं बताता मगर वहां पर कुछ सालों पहले की हुई प्लांटेशन साफ दिख रही है। जब प्लांटेशन फारेस्ट ने की है तो आखिर किसकी जमीन पर की गई है, यह भी जांच का विषय है।
एसडीएम ने किया मौका निरीक्षण
इस एरिया में अवैध खनन का मुद्दा उछलने के बाद एसडीएम ने मौका निरीक्षण किया। इस दौरान डीएफओ , तहसीलदार व वन कर्मचारी भी मौजूद रहे। एसडीएम रोहित कुमार ने बताया यहां पर जिसने भी अवैध खनन किया है उस पर एफआईआर करवाई जाएगी। इसके अलावा लगातार इस एरिया में अलर्ट रहने के लिए माइनिंग विभाग को आदेश जारी कर दिया गया है।





