- कार्रवाई के नाम पर पत्रों की कागजी नाव पर हो रही है सवारी, न नुकसान की भरपाई न आरोपियों का सुराग
ताजेवाला, यमुनानगर। ताजेवाला से नैनावाली का रास्ता अवैध खनिज परिवहन के लिए सुगम रास्ता बना हुआ है। इस रास्ते की वजह से ताजेवाला की पंचायती जमीन लगातार खनिज चोरों के निशाने पर है। इस रुट से अवैध खनिज सामग्री सीधा मांडेवाला, भूड़कलां व बल्लेवाला एरिया में बनी क्रशिंग यूनिटस पर जा रही है। ताजेवाला पंचायत ने कई बार इस रास्ते पर लोहे के एंगल आदि लगाकर बंद करने का प्रयास किया मगर खनन चोर जो अब खनन माफिया बन चुका है वह इन अवरोधकों को तोड़ वाहनों को निकाल कर ले जाता है। पंचायती जमीन से हो रहे अवैध खनन के मामले में खंड प्रतापनगर कार्यालय द्वारा डीसी के अलावा थाना प्रतापनगर को पत्र भेज कर आगामी कार्यवाही करने की मांग की है। मगर पूरा मामला केवल पत्र व्यवहार तक सीमित हो जाता है। खनन विभाग अपनी जिम्मेदारी को नहीं समझ रहा है बाकी संबधित विभाग भी खनन विभाग के ढर्रे पर चल इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
ताजेवाला में यमुना नदी में लगातार बोल्डर यानी पत्थर का अवैध खनन होता रहा है जो अब भी निरंतर जारी है। बिना किसी रायल्टी के यहां से करोड़ों का पत्थर पिछले एक दशक से अधिक समय से चोरी हो चुका है। अधिकतर पत्थर यहां से सिंचाई विभाग के कामों की साइटस पर जाता रहा है। केवल यमुना ही नहीं लंबे समय से पंचायती जमीन भी खनिज चोरों के निशाने पर आ गई है। पंचायत द्वारा लगातार पंचायती जमीन से अवैध खनिज होने की शिकायत की जा रही है। यहीं नहीं पंचायत ने कई बार इस खनिज सामग्री के परिवहन के लिए नैनावाली के रास्ते को भी एंगल आदि लगाकर बंद करवाया है। मगर हर बार रास्ते के अवरोधक को तोड़ दिया जाता है। वर्तमान में न केवल पचांयती जमीन बल्कि मांडेवाला जंगल के साथ लगती प्राइवेट लैंड पर लगातार अवैध खनन चल रहा है उसके लिए भी इसी रुट का उपयोग हो रहा है।
खंड कार्यालय द्वारा 10 दिसंबर को डीसी को ओर 11 दिसंबर को प्रतापनगर थाना प्रभारी को लिखा पत्र
10 दिसंबर 2025 को डीसी को खंड कार्यालय प्रतापनगर की ओर से जो पत्र भेजा गया उसमें कहा गया कि ताजेवाला पंचायत ने 2 दिसंबर 25 के प्रस्ताव के माध्यम से अनुरोध किया है कि पंचायत ताजेवाला का एक रास्ता रांगड़ान बांस से होता हुआ नैनावाली की ओर जाता है। ग्राम पंचायत में जब-जब अवैध खनन होता है तो अवैध खनन करने वाले इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। पहले इस रास्ते को बेरीकेंडिग लगाकर बंद कर दिया गया था। मगर अज्ञात लोगों द्वारा उक्त अवरोधकों को तोड़ दिया गया। वर्तमान में जब भी पंचायती जमीन पर अवैध खनन की सूचना प्राप्त होती है ,महिला सरपंच होने के नाते अकेले सरपंच द्वारा कोई कार्रवाई करना संभव नहीं होता। इसलिए दोबारा से इस रास्ते को लोहे के चैनल-एंगल लगाकर बंद किया जाए। इस रास्ते पर यदि पुलिस चौकी बना दी जाए तो रास्ते में अवैध खनन के वाहनों के आवागमन पर अंकुश लगाया जा सकता है। निजी भूमि के साथ यमुना नदी की पटरी लगती है वहां पर अवैध खनन होने से पटरी टूटने का खतरा बना रहता है। इस पत्र को खंड कार्यालय द्वारा डीसी को भेज दिया गया, मगर लगभग एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी आगामी क्या कार्रवाई हुई इसका पता नहीं है।
यहीं नहीं 11दिसंबर 25 को फिर से खंड कार्यालय द्वारा थाना प्रभारी प्रतापनगर को पत्र के माध्यम से अवगत कराया कि ताजेवाला की पंचायती भूमि खसरा नंबर 155//3/2, 155//1/2 पर रात के समय अवैध खनन होने की सूचना पंचायत ने प्रस्ताव के माध्यम से दी है। इससे ग्राम पंचायत को काफी वितिय हानी हुई है। इसमें अवैध खनन करने वाले अज्ञात लोगों के खिलाफ कार्यवाही करने को कहा गया।
सवाल यह है कि क्या कार्यवाही केवल कागजों में सिमट कर रह जाएगी। पंचायत ने प्रस्ताव दिया ओर खंड कार्यालय ने डीसी कार्यालय या पुलिस को सूचित कर दिया। केवल कागजी नाव से नैया पार हो पाएगी। इन पत्रों का फालोअप क्यों नहीं किया जाता है, यानी अगर किसी स्तर पर जानकारी के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं होती तो उसके आगे क्या कदम उठाया गया।
पंचायत विभाग के पास संसाधनों की कमी नहीं है जिस जमीन पर अवैध खनन हो रहा है उसकी तारबाड़ आदि करवाने के लिए या उस पर दोबारा से ऐसी एक्टिविटी न हो उसके लिए क्या कुछ किया गया। चोरी की सामग्री का कितनी बार मूल्यांकन खनन विभाग ने किया, यानी पिछले एक दशक में कुल कितना नुकसान पंचायत को हुआ। उसकी भरपाई कैसे होगी। इसकी ओर भी ध्यान देने की जरुरत है। खनन विभाग द्वारा पत्र मिलने के कितने समय बाद कार्रवाई की गई यह भी महत्वपूर्ण है।





