खैर की लकड़ी से लदा कैंटर किया काबू, स्टाफ की सर्तकता से एक बार फिर बाजार तक नहीं पहुंच पाई खैर की लकड़ी

कलेसर, यमुनानगर। वन विभाग कोट ब्लाक के स्टाफ ने वाइल्ड लाइफ स्टाफ के साथ मिलकर सढौरा में खैर से भरा एक कैंटर काबू किया। जिसमें 30 से 40 किवंटल तक खैर की लकड़ी लदी हुई थी। लकड़ी को वन्य प्राणी विहार खिल्लावांला, डारपुर, मेहरनीवाला व टिब्ब्डियों से काटा गया था। जिसमें लगभग 18 पेड़ काटे जाने का पता चला है। इसके साथ ही गाड़ी से 114 पीस खैर के बरामद हुए हैं। आरोपी मौके से फरार होने में सफल हो गए। पकड़े गए कैंटर पर उतराखंड के रजिस्ट्रेशन नंबर की प्लेट लगी है।

विभागीय सूत्रों ने बताया कि फारेस्ट विभाग के कोट ब्लाक के इंचार्ज बृजमोहन व दरोगा मिंटू को सूचना मिली थी कि खैर की लकड़ी से लदा एक कैंटर जाटांवाला से निकल कर चंडीगढ़ की ओर जाएगा। फारेस्ट स्टाफ ने इसकी सूचना अपने अधिकारियों के साथ वाइल्ड लाइफ के स्टाफ को दी। जिसके बाद कैंटर का पीछा शुरु किया गया। खैर तस्करों को स्टाफ द्वारा पीछा करने की भनक लगने के बाद कैंटर को छछरौली-बिलासपुर के अलावा साढौरा के अन्य रास्तों पर घुमाया गया। एक बार तो स्टाफ की नजर से कैंटर ओझल हो गया, मगर लगातार पीछा करने के बाद आखिरकर स्टाफ ने कैंटर को फाजिलपुर के पास घेर लिया व इस दौरान आरोपी कैंटर को छोड़ कर फरार हो गए।

कैंटर को तड़के ही छछरौली रेंज लाया गया, बाद इसको दिन में वन्य प्राणी कार्यालय कलेसर लाया गया। जहां पर खैर के पीस की गिनती की गई व इनको पूर्व में काटी गई एफओरआर से मिलान किया गया। कुल 18 पेड़ काटे जाने की सूचना है जिन्हें वन्य प्राणी विहार से काटा गया। इस मामले को सुबह कोर्ट में पेश किया जाएगा।

कोओर्डिनेशन की कमी, नजरअंदाजी जिम्मेदार

नब्बे के दशक से हो रही खैर तस्करी एक बार फिर से चरम पर है। जाटांवाला गांव इस तस्करी का मुख्य केंद्र बनता जा रहा है। लगातार पकड़ी जा रही गाड़ियों के साथ आरोपियों का संबधं भी जाटावांला से जुड़ता रहा है। यहां के तस्कर यमुनानगर से लेकर पंचकूला तक के जंगलों को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचा रहे है।

इतनी बड़ी समस्या को डिविजन से लेकर सर्कल व वन मुख्यालय तक के अधिकारी गंभीरता से नहीं ले रहे। चार-पांच दिन पहले छछरौली रेंज में पकड़ी गई एक पिकअप के बाद अगले दिन फिर से एक पिकअप निकली जिसका पीछा किया गया जो वापस चली गई। यदि जाटावालां के दोनों ओर नाकाबंदी कर दी जाए तो काफी हद तक समस्या का कंट्रोल किया जा सकता है।

बताया जाता है कि फारेस्ट डिविजन यमुनानगर में तीन से चार दरोगा स्पैशल डयूटी पर है। फील्ड में स्टाफ कमी है खैर कटान की वारदात लगातार हो रही है। इतना सब कुछ होने के बाद उनको फील्ड में क्यों नहीं भेजा जा रहा। अगर यह सब फील्ड में डयूटी दे तो कुछ तो फील्ड स्टाफ की मदद हो सकती है। सबसे बड़ी बात यह है कि जंगल से महत्वपूर्ण क्या काम हो सकता है। फारेस्ट को अगर जरुरत नहीं है तो यह स्टाफ वाइल्ड लाइफ को भेज देना चाहिए। 

इस बारे में जब वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर लीलू राम से बात की गई तो उनका कहना था कि जांच जारी है, जिसके बाद कल ही वह कुछ बता पाएंगे।

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