पंचकूला: हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने रबी विपणन सीजन 2026 के लिए किसानों हेतु नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि मंडी में फसल लाने और गेट पास प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुगम बनाया गया है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे गेट पास को लेकर फैल रही किसी भी भ्रांति या अफवाह पर ध्यान न दें।
हेल्पलाइन नंबर जारी
यदि किसी किसान को मंडी में फसल बिक्री या पंजीकरण से संबंधित कोई समस्या आती है, तो वह बोर्ड द्वारा जारी टोल फ्री नंबर 18001802060 पर संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकता है।
गेट पास और वाहनों के लिए बड़ी राहत
किसानों की सुविधा के लिए नियमों में लचीलापन लाया गया है:
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वाहनों की छूट: अब किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली के अलावा बैलगाड़ी या अन्य साधनों से भी अपनी फसल मंडी ला सकते हैं।
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रजिस्ट्रेशन नंबर: यदि ट्रैक्टर पर स्थायी नंबर प्लेट नहीं है, तो किसान पेंट या पेपर स्टिकर पर रजिस्ट्रेशन नंबर लिखकर भी प्रवेश पा सकते हैं।
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समय सीमा: गेट पास सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक काटे जाएंगे। कार्य में तेजी लाने के लिए हरियाणा कौशल रोजगार निगम के अतिरिक्त कर्मचारियों को तैनात किया गया है।
जियो-फेंसिंग और पारदर्शी तकनीक
मंडी बोर्ड ने इस बार तकनीक का कड़ा पहरा बिछाया है। पूरी मंडी क्षेत्र की जियो-फेंसिंग (Geo-fencing) की गई है। गेट पास कटने से लेकर फसल की निकासी तक की पूरी प्रक्रिया इसी निर्धारित डिजिटल दायरे के भीतर पूरी की जाएगी, जिससे गड़बड़ी की संभावना समाप्त हो जाएगी।
सत्यापन के 3 सरल तरीके
किसानों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम को और मजबूत किया गया है। यदि एक तरीका काम नहीं करता, तो वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध है:
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फिंगर प्रिंट: उंगलियों के निशान के जरिए बायोमेट्रिक सत्यापन।
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आई-स्कैन: उंगलियां स्कैन न होने पर आंखों की पुतलियों (Iris) से सत्यापन।
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ओटीपी (OTP): तकनीकी खराबी की स्थिति में कमेटी के निर्णय पर ओटीपी के माध्यम से तुरंत समाधान किया जाएगा।
पंजीकरण और नामित व्यक्ति
‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर अब न केवल जमीन का मालिक, बल्कि पट्टे पर खेती करने वाला किसान भी रजिस्ट्रेशन करा सकता है। किसान अपने साथ-साथ किन्हीं तीन नामित व्यक्तियों (रिश्तेदार या परिचित) को भी पंजीकृत कर सकता है, जो उसकी अनुपस्थिति में फसल मंडी ला सकेंगे।
ऑनलाइन उठान प्रक्रिया
फसल की खरीद के बाद उठान (लिफ्टिंग) प्रक्रिया को भी डिजिटल किया गया है। इंस्पेक्टर द्वारा जारी ‘आउट गेट पास’ ट्रांसपोर्टर के लॉगिन में दिखाई देगा, जिसे मंडी सचिव की स्वीकृति के बाद ही फाइनल किया जाएगा। इससे उठान कार्य में पारदर्शिता बनी रहेगी और समय की बचत होगी।




