- हथिनीकुंड बैराज पर थीम पार्क के नार्थ वेस्ट में सिंचाई विभाग द्वारा बनाए गए रेस्तरां पर सीएजी रिपोर्ट में भी उठाए गए सवाल
हथनीकुंड, यमुनानगर। हथनीकुंड बैराज के समीप लगभग पौने दो करोड़ की लागत से बनाया गया रेस्टारेंट बैराज पर लेबर क्वार्टर/ हाऊस बन कर रह गया है। बैराज में काम कर रही कंपनी की लेबर यहां पर रह रही है। पौने दो करोड़ लगाकर इस रेस्टोरेंट को लावारिस छोड़ दिया गया है। बिना किसी बिजली मीटर के यहां पर लगभग 500 से 600 मीटर दूर बने वाटर सप्लाई पंप से लाइट आ रही है। रेस्टोरेंट के पीछे खाली शराब व सोडे की बोतलें पड़ी है। विभाग के कार्यकारी अभियंता का कहना है कि रेस्टोरेंट को टेंडर पर देने के प्रयास सफल नहीं हो पाए अब विभागीय नियमावली के अनुसार इसे किसी एनजीओ को चलाने के लिए दिया जाएगा। वहीं सीएजी की रिपोर्ट में इस रेस्टोरंट पर किए गए व्यय व उसकी उपयोगिता पर सवाल खड़े किए गए हैं।
हथनीकुंड बैराज को पर्यटन केंद्र विकसित करने के उददेश्य से यहां पर बने पार्क के नवीनीकरण व सौंर्दयीकरण के लिए फरवरी 2016 में 15 करोड़ के बजट की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई। इसी परियोजना के एक भाग के रुप में हथिनीकुंड बैराज पर रेस्ट हाऊस के पास एक रेस्तरां के निर्माण के लिए 1.42 करोड़ का दिसंबर 2017 में एक अनुमान स्वीकृत किया। जिसे संशोधित करके जनवरी 2021 में 1 करोड़ 57 लाख कर दिया गया था। टेंडर प्रक्रिया के बाद सात माह की समय सीमा के लिए कार्य एक एजेंसी को 2018 में आबंटित कर दिया गया। एजेंसी द्वारा 1.54 करोड़ की लागत से फरवरी 2020 में यह काम पूर्ण कर दिया गया।
सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 21 माह बाद नवंबर ओर दिसंबर 2021 में सिंचाई विभाग ने रेस्तरां को न्यूनतम आरक्षित मूल्य एक लाख प्रतिमाह व ओर 25 लाख की सिक्योरिटी लेकर पटटे पर देने के लिए 2 बार टेंडर काल किया। मगर किसी ने आवेदन नहीं किया। ई नीलामी प्रक्रिया में किसी भी एजेंसी के भाग न लेने के कारण शर्तो में छूट देकर 50 हजार प्रतिमाह व सिक्योरिटी राशि 10 लाख करके डीएनआईटी का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। कार्यकारी अभियंता के प्रस्ताव को अधीक्षण अभियंता ने वापस कर दिया व इस रेस्तरां को पटटे पर देने के लिए पर्यटन विभाग से संपर्क करने को कहा। इसके बाद सिंचाई विभाग ने पर्यटन विभाग से मार्च 2022 में रेस्तरां को पहले वाली शर्तों पर पटटे पर देने का कार्य संभालने का अनुरोध किया। मगर कोई बात नहीं बन पाई।
राजस्व को नहीं मिला एक रुपया ओर देखरेख में ओर खर्च दिए बीस लाख
सीएजी की रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि फरवरी 2020 से से जुलाई 2022 तक रेस्तरां की निगरानी पर 20 लाख रुपये की राशि खर्च दी गई, यानी सफेद हाथी बने इस रेस्तरां की निगरानी पर ही लाखों का बजट लगा दिया गया अब दो वर्ष में 20 लाख में ऐसा क्या लगा यह जांच का विषय है। वहीं सीएजी की रिपोर्ट में इस रेस्तरां पर खर्च कुल 1.74 करोड़ की राशि को व्यर्थ बताया गया है।
रेस्तरां को पौने दो करोड़ खर्च कर लेबर क्वार्टर बना दिया गया है
हथिनीकुंड में नेशनल हाइवे से विभाग के रेस्ट हाऊस की ओर जा रही सड़क पर बने इस रेस्तरां को अब लेबर क्ववार्टर बना दिया गया है। वीरवार को जब यमुनापोस्ट की टीम मौके पर पहुंची तो रेस्तरां के बाहर लेबर के कपड़े सूख रहे थे। एक बड़े हाल में जहां पर 4 से 5 एसी लगे हुए थे वहां पर लेबर के बिस्तर पड़े हुए थे। मौजूदा लेबर का कहना था कि वह बैराज का काम कर रही कंपनी के कर्मचारी है। यहां पर बिजली का इस्तेमाल तो हो रहा था मगर बिजली लगभग आधा किलोमीटर दूर से एक पेयजल आपूर्ति के पंप से आ रही थी वहीं से एक बड़ी तार रेस्तरां तक डाली गई थी। रेस्तरां में कई जगह गंदगी के ढेर लगे हुए थे। रेस्तरां के पीछे शराब व सोडे की बोतले पड़ी हुई थी।
इस बारे में जब सिंचाई विभाग जगाधरी के कार्यकारी अभियंता विनोद छाछिया से बात की गई तो उनका कहना था कि इस रेस्टोरेंट को कई बार ठेके पर देकर चलाने का प्रयास किया गया मगर वह सफल नहीं हो पाया। अब इसको किसी एनजीओ को सौंप कर चलाने का प्रयास किया जाएगा। जब उनसे पूछा गया कि यहां पर लेबर कैसे रह रही है तो उनका कहना था कि लेबर का यहां पर रुकना गलत है वह लेबर को यहां से बाहर करने के लिए अभी स्टाफ को कहते हैं।




