-राज्यभर में विशेष प्रवर्तन अभियान, 113 दवा दुकानों की जांच, 93 सैंपल लिए गए
चंडीगढ़/हरियाणा। वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) हरियाणा ने प्रतिबंधित एलोपैथिक दवाओं के पशु उपचार में हो रहे दुरुपयोग को रोकने के लिए राज्यव्यापी विशेष चेकिंग अभियान चलाया। यह अभियान “सेव वल्चर्स (गिद्ध बचाओ)” पहल के तहत संचालित किया गया।
FDA ने स्पष्ट किया है कि कुछ एलोपैथिक दवाएं पशुओं के इलाज में उपयोग होने पर गिद्धों के लिए घातक साबित हो रही हैं, इसलिए इनके पशु चिकित्सा उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
❌ प्रतिबंधित दवाओं की सूची
डाइक्लोफेनाक – 04 जुलाई 2008 से प्रतिबंधित
केटोप्रोफेन – 31 जुलाई 2023 से प्रतिबंधित
ऐसिक्लोफेनाक – 31 जुलाई 2023 से प्रतिबंधित
नाइमेसुलाइड – 30 दिसंबर 2024 से प्रतिबंधित
हालांकि ये दवाएं मानव उपचार में अनुमन्य हैं, लेकिन पशु चिकित्सा में इनका उपयोग सख्त रूप से गैरकानूनी है।
🔍 विशेष प्रवर्तन अभियान
15 जनवरी 2026 को FDA हरियाणा द्वारा पूरे राज्य में औचक निरीक्षण अभियान चलाया गया।
अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी थोक या खुदरा दवा विक्रेता इन प्रतिबंधित दवाओं को पशु उपचार के लिए न बेचे।
कार्रवाई के मुख्य बिंदु:
✅ 113 थोक व खुदरा दवा दुकानों का निरीक्षण
✅ 93 पशु चिकित्सा दवाओं के नमूने लिए गए
✅ सभी नमूनों को सरकारी मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में जांच हेतु भेजा गया
जांच रिपोर्ट के आधार पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट व नियमों के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
🌿 क्यों खतरनाक हैं ये दवाएं?
वल्चर कंजरवेशन एंड ब्रीडिंग सेंटर, पिंजौर की रिपोर्ट के अनुसार:
इन दवाओं से उपचारित पशुओं के शरीर में दवा के अवशेष रह जाते हैं।
मृत पशुओं का मांस खाने पर गिद्धों को तीव्र किडनी फेल्योर हो जाता है।
इससे उनकी तेजी से मौत हो रही है।
परिणामस्वरूप गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
🦅 गिद्ध क्यों हैं जरूरी?
गिद्ध पर्यावरण के प्राकृतिक सफाईकर्मी हैं। वे मृत पशुओं के अवशेष हटाते हैं। संक्रमण और बीमारियों के फैलाव को रोकते हैं। पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं
इनकी घटती संख्या जनस्वास्थ्य, जैव विविधता और पारिस्थितिकी संतुलन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
🏛️ FDA हरियाणा की प्रतिबद्धता
स्टेट ड्रग्स कंट्रोलर, हरियाणा ललित गोयल ने कहा कि विभाग सुरक्षित व मानक गुणवत्ता वाली दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा ।अवैध दवा उपयोग पर सख्ती बरतेगा। भविष्य में भी ऐसे विशेष अभियान जारी रखेगा। दवा विक्रेताओं व पशुपालकों में जागरूकता बढ़ाएगा




