पंचकूला। हरियाणा खाद्य एवं औषधि प्रशासन पंचकूला मुख्यालय द्वारा इंडस्ट्रियल-ग्रेड हाई-रिस्क सॉल्वेंट्स और एक्सीपिएंट्स की लेबलिंग व बिक्री को लेकर सख्त एडवाइजरी जारी की है। यह आदेश 31 दिसंबर 2025 को राज्य औषधि नियंत्रक ललित कुमार गोयल द्वारा जारी किया गया। इसका उद्देश्य बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के इन रसायनों की बिक्री पर रोक लगाना, संभावित दुरुपयोग व जनस्वास्थ्य जोखिमों को कम करना और फार्मास्यूटिकल सप्लाई चेन में गुणवत्ता व सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

एफडीए ने यह एडवाइजरी केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के प्रवर्तन प्रभाग द्वारा 22 दिसंबर 2025 को जारी परामर्श के अनुपालन में जारी की है। आदेश की जानकारी हरियाणा राज्य फार्मास्यूटिकल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के माध्यम से राज्य के सभी दवा निर्माताओं, आयातकों, वितरकों और व्यापारियों तक पहुंचाई गई है।
क्या हैं मुख्य निर्देश?
हाई-रिस्क इंडस्ट्रियल-ग्रेड सॉल्वेंट्स पर चेतावनी लेबल अनिवार्य
ऐसे सभी सॉल्वेंट्स के हर कंटेनर पर साफ, स्पष्ट और पढ़ने योग्य लेबल होना जरूरी है, जिस पर (दवा निर्माण के लिए नहीं) स्पष्ट रूप से लिखा हो। यही चेतावनी बिक्री इनवॉइस, डिलीवरी चालान और लेन-देन से जुड़े सभी दस्तावेजों पर भी प्रमुखता से छापी जाएगी।
ढीली (लूज) बिक्री पर रोक, सील्ड कंटेनर जरूरी
एक्सीपिएंट्स और हाई-रिस्क सॉल्वेंट्स की बिक्री केवल मूल, सील्ड और टैम्पर-प्रूफ कंटेनरों में ही की जाएगी।
कंटेनरों पर पूरी लेबलिंग और बैच-ट्रेसेबिलिटी (बैच की पहचान व रिकॉर्ड) अनिवार्य होगी, ताकि किसी भी स्तर पर ट्रैकिंग संभव हो।
उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
एफडीए ने साफ किया है कि इन निर्देशों का पालन न करने पर लाइसेंस निलंबन/रद्द करने सहित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम जनहित और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
इस आदेश की प्रतियां डीसीजी(I) प्रवर्तन प्रभाग, उत्तर क्षेत्र गाजियाबाद, डीडीसी (I) सहित सभी संबंधित औषधि नियंत्रण अधिकारियों, राज्य के थोक विक्रेताओं/वितरकों को सूचना व अनुपालन के लिए भेजी गई हैं।





