जालंधर,पंजाब। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर जोनल कार्यालय ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने 22 दिसंबर 2025 को पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और असम के 11 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई।
ईडी के अनुसार, यह जांच लुधियाना के प्रसिद्ध उद्योगपति से जुड़े डिजिटल अरेस्ट ठगी मामले से संबंधित है। तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस बरामद कर जब्त किए गए हैं।
ईडी ने यह जांच साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, लुधियाना द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इसके बाद इसी गिरोह से जुड़े साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट मामलों में विभिन्न पुलिस एजेंसियों द्वारा दर्ज नौ अन्य एफआईआर को भी जांच में शामिल किया गया।
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर और फर्जी सरकारी व न्यायिक दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लुधियाना के प्रसिद्ध उद्योगपति को डिजिटल अरेस्ट में लिया। इसके जरिए उनसे करीब 7 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए। इनमें से 5.24 करोड़ रुपये विभिन्न खातों से बरामद कर वापस किए जा चुके हैं। शेष राशि को म्यूल अकाउंट्स के जरिए इधर-उधर किया गया, जिन्हें मजदूरों और डिलीवरी बॉय के नाम पर खोला गया था, और बाद में नकद निकाल लिया गया।
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि इन म्यूल खातों का संचालन असम की रहने वाली रूमी कलिता कर रही थी, जिसे ठगी की रकम का एक तय प्रतिशत हिस्सा दिया जाता था। तलाशी के दौरान मिले साक्ष्यों से पता चला है कि रूमी कलिता मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपराध से अर्जित धन के डायवर्जन और लेयरिंग में गहराई से शामिल थी।
ईडी ने रूमी कलिता को 23 दिसंबर 2025 को PMLA के तहत गिरफ्तार किया। उन्हें कामरूप (मेट्रो), गुवाहाटी की सीजेएम अदालत से चार दिन की ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया, जिसके बाद जालंधर की विशेष PMLA अदालत ने आरोपी को 2 जनवरी 2026 तक 10 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है। ईडी ने बताया कि इस मामले में पहले भी 31 जनवरी 2025 को तलाशी की गई थी, जिसमें आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए थे। मामले में आगे की जांच जारी है।





