यमुनानगर। जिला प्रशासन द्वारा अवैध खनिज परिवहन और ओवरलोडिंग पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं। चेकिंग प्वाइंट्स की संख्या 8 से बढ़ाकर 18 कर दी गई है, साथ ही ओवरलोडिंग पर शिकंजा कसने के निर्देश जारी किए गए हैं। बावजूद इसके, खनन क्षेत्र में एक नया और गंभीर मामला सामने आया है।

बताया जाता है कि यमुनानगर में जिला पंचकूला से कच्चे खनिज की खरीद की जा रही है। जबकि व्यवहारिक रुप से यह  संभव नहीं है, क्योंकि यमुनानगर के बाद अंबाला जिले का बार्डर क्रास करके पंचकूला जिला पड़ता है जो कम से कम 70 से 80 किलोमीटर दूर पड़ता है। ऐसे में आखिर इतनी दूर से कच्चे माल की खरीद किस प्रकार हो रही है

केवल कागजों में हो रही है खरीद

खनिज व्यवसाय से जुड़े लोग बता रहे हैं कि केवल कागजों में खरीद की बिलिंग हो रही है। जबकि कच्चा माल यही से निकाला जा रहा है। ऐसे में यह फर्जीवाड़ा के अलावा ओर कुछ नहीं है।

इसी खरीद के आधार पर यमुनानगर के क्रशिंग जोन से तैयार माल की सेल की जा रही है, यानी माल कहीं से नहीं आ रहा है केवल परचेज इनवाइस के आधार पर तैयार माल की सेल बिलिंग हो रही है। इससे सरकारी खजाने को भारी राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

🚛 प्रतिदिन 1200–1500 डंपरों की आवाजाही

  • जानकारी के अनुसार, यमुनानगर खनन जोन से रोजाना 1200 से 1500 डंपर खनन सामग्री लेकर निकलते हैं।

❗ चेकिंग प्वाइंट्स पर ढिलाई?

    • प्रशासन ने 18 चेकिंग प्वाइंट बनाए हैं।

    • डंपर चालक जब अपने ई-रवाना दिखाते है उसमें न केवल सेल करने वाले प्वायंट का जिक्र होता है बल्कि किस खनन साइट से माल आता है उसकी भी डिटेल होती है। ऐसे में क्या विभाग इसकी जांच करता है कि माल आखिर वहां से आ भी रहा है या नहीं।

🚛 80 किमी दूर से ‘कच्चा माल’ लाने का अजूबा

हैरानी की बात यह है कि यमुनानगर के क्रशर मालिक कागजों में माल पंचकूला से खरीद रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि:

    1. दूरी का गणित: पंचकूला से यमुनानगर की दूरी कम से कम लगभग 70-80 किलोमीटर है।

    2. व्यावहारिक असंभवता: इतनी दूर से भारी कच्चा माल (Raw Material) ट्रक में भरकर लाना घाटे का सौदा है। डीजल और समय का खर्च माल की कीमत से ज्यादा बैठता है।

    3. असली खेल: आरोप है कि माल यमुनानगर की ही किसी अवैध साइट से निकाला जाता है, लेकिन उसे वैध दिखाने के लिए पंचकूला के ई-रवाना (e-Rawana) का इस्तेमाल किया जा रहा है।

🗣️ खनन कारोबारियों की मांग

  • दूसरे जिलों के ई-रवाना के नाम पर खनिज परिवहन पूरी तरह गलत।

  • पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।

  • लगाए गए नाकों से फर्जी बिलों वाले डंपरों का परिवहन रोका जाए।

  • जिम्मेदार स्टाफ व खनिज तस्करों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

📌 प्रशासन के सामने चुनौती

  • चेकिंग प्वाइंट्स बढ़ाने के बावजूद अवैध परिवहन जारी।

  • ई-रवाना सिस्टम की मॉनिटरिंग और क्रॉस-वेरिफिकेशन की जरूरत।

  • डिजिटल ट्रैकिंग और रियल-टाइम डेटा शेयरिंग सिस्टम लागू करने की आवश्यकता।

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